ताज के साये में फल रहा इलाज का कारोबार, सेवा की जगह मुनाफे का मॉडल?

आगरा ताजमहल की खूबसूरती के साथ-साथ तेजी से फैलते निजी नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक नेटवर्क के लिए भी जाना जाने लगा है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव ने इलाज को सेवा से कारोबार की ओर मोड़ दिया है, जहां जांच, सर्जरी और बिल अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा लगते हैं। अनियंत्रित निजी स्वास्थ्य सेवाएं, कमजोर […]

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AI का ‘डार्क साइड’: ​टेक्नोलॉजी की प्यास; क्या डेटा सेंटरों की भूख हमारे जल और बिजली संसाधनों को निगल जाएगी?

ये है AI का भयावह सत्य जो आम नागरिक को नहीं पता। आज दुनिया भर में बड़े-बड़े “मेगा डेटा सेंटर” बनाए जा रहे हैं, जो क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई मॉडल और डिजिटल सेवाओं को चलाते हैं। लेकिन इन केंद्रों की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि ये अत्यधिक पानी और बिजली की खपत करते हैं। अंतरराष्ट्रीय […]

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एपस्टीन फाइल्स का ‘विस्फोट’: क्या वैश्विक सत्ता के काले जाल में फंसा है लोकतंत्र?

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक की जा रही एपस्टीन फाइल्स केवल एक आपराधिक कांड का खुलासा नहीं हैं, बल्कि वे आधुनिक लोकतंत्रों की पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्ता-संरचना पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। जेफरी एपस्टीन एक ऐसा नाम, जो वित्तीय वैभव, राजनीतिक पहुँच और यौन शोषण के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्याय बन चुका है की […]

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खुशी के टिकट पर मातम का सफर: मेलों में झूलों की ‘फिटनेस’ महज औपचारिकता या सिस्टम का बड़ा खेल?

हरियाणा के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में झूला टूटने की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे यहाँ मनोरंजन भी जान जोखिम में डालकर ही किया जाता है। जिस मेले को संस्कृति, कला और पर्यटन का उत्सव कहा जाता है, वही मेला एक पल में चीखों, अफरातफरी और मातम में बदल गया। झूले […]

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दिल्ली से आगरा तक एक ही कहानी: सरकारी खुदाई, अंधेरी रात और नागरिकों की सस्ती जान— कब जागेगा प्रशासन?

एक तरफ वो विशेषाधिकार प्राप्त सत्ता है जो महज आशंकाओं के घेरे में संसद से दूरी बना लेती है, और दूसरी तरफ वो आम नागरिक है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए उन सड़कों पर उतरने को मजबूर है जो उसकी ‘कब्र’ तैयार बैठी हैं। दिल्ली के जनकपुरी में 26 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत कोई […]

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रील से राष्ट्र-निर्माण: युवा भविष्य को किस दिशा में ले जा रहा बजट 2026?

केंद्रीय बजट 2026 ने भारत की युवा नीति, शिक्षा प्रणाली और कौशल विकास की दिशा को लेकर एक आवश्यक और स्वस्थ बहस को जन्म दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में कंटेंट क्रिएशन लैब्स की घोषणा, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल मीडिया जैसे उभरते क्षेत्रों में ट्रेनिंग, तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप-टेक में फेलोशिप, ये सभी संकेत […]

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लोकतंत्र की कसौटी: क्या हम केवल अधिकारों के प्रति सजग हैं या कर्तव्यों के प्रति भी? एक आत्मचिंतन

हाल ही में देश ने अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाया। परेड, सांस्कृतिक झांकियाँ, राष्ट्रपति का संबोधन और राष्ट्रगान की गूंज, ये सभी दृश्य एक बार फिर हमारी सामूहिक चेतना का हिस्सा बने। हर वर्ष की तरह इस बार भी 26 जनवरी ने हमें गर्व का अनुभव कराया, लेकिन गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं […]

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प्रयागराज माघ मेला 2026: संगम की रेती पर भक्ति और शक्ति का महासंग्राम, क्या झुकेगा प्रशासन?

प्रयागराज माघ मेला 2026 में इस बार भक्ति की धारा जितनी तेज नहीं दिख रही, उससे ज्यादा चर्चा विवाद और प्रशासन-संत टकराव की हो रही है। संगम तट पर जहां श्रद्धालु मोक्ष की कामना लेकर पहुंचते हैं, वहीं मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई घटना ने […]

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विवादों में ‘इक्विटी रेगुलेशंस 2026’: ओबीसी को परिभाषा में शामिल करने पर सामान्य वर्ग में नाराजगी, दुरुपयोग की आशंका को लेकर छिड़ी बहस

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026” लागू कर दिए हैं। इन नियमों को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है और कुछ वर्गों में नाराजगी भी सामने आने लगी है। यूजीसी की नई गाइडलाइंस […]

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​”विचार से डरेगा समाज तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?”— मनोज रूपड़ा प्रकरण पर डॉ. प्रियंका सौरभ का बेबाक विश्लेषण

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ हुआ सार्वजनिक दुर्व्यवहार केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे समय के अकादमिक और सांस्कृतिक जीवन में गहराते संकट का स्पष्ट संकेत है। किसी आमंत्रित लेखक को मंच पर अपमानित करना और कार्यक्रम […]

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