हिस्ट्रीशीटर बने रिपोर्टर: जब कलम की जगह ‘कैमरा’ बन जाए अवैध वसूली का आधुनिक कट्टा

यह महज़ पत्रकारिता के गिरते स्तर का रोना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के मलबे पर खड़े एक संगठित अपराध की डरावनी कहानी है। आज मोबाइल कैमरे, कौड़ियों के भाव मिलने वाले आई-कार्ड और सस्ते चाइनीज माइक जनसेवा के उपकरण नहीं, बल्कि अवैध वसूली के सबसे घातक हथियार बन चुके हैं। एक ऐसा […]

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इमोशन से ‘बिजनेस डील’ बनती शादियाँ: मेट्रो शहरों में आर्थिक दबाव ने पैदा किया युवाओं में शादी का खौफ

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि दो वयस्क अपनी आपसी सहमति से एक साथ रह रहे हैं, तो इसे कानून की नजर में अपराध नहीं माना जा सकता, भले ही उनमें से कोई एक साथी पहले […]

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अस्पताल जाना जिम्मेदारी है, औपचारिकता नहीं; जानें मरीज की मदद करने का सही और व्यावहारिक तरीका

जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती […]

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विरासत पर लापरवाही का साया: आगरा के 265 स्मारकों पर मंडराया संकट, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

आगरा (बृज खंडेलवाल): दुनिया भले ही ताजमहल की धवल चमक पर फिदा हो, लेकिन इसी शहर की गलियों में इतिहास सिसक रहा है। आगरा की असली पहचान उसके गुमनाम मकबरे, टूटते दरवाजे और झाड़ियों में तब्दील होते मुगलकालीन बाग आज व्यवस्था की अनदेखी के कारण दम तोड़ रहे हैं। इस प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ एडवोकेट […]

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फ्यूचर इकोनॉमी: कार्बन क्रेडिट के जरिए भारत कैसे हासिल करेगा 2030 के जलवायु लक्ष्य और आर्थिक बढ़त?

आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही है। मौसम का असंतुलन, बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश और प्राकृतिक आपदाएँ अब सामान्य बात बनती जा रही हैं। ऐसे समय में ‘कार्बन क्रेडिट’ शब्द अक्सर सुनने को मिलता है। लेकिन आम नागरिक के मन में सवाल होता है आखिर यह है क्या? और इसका हमसे […]

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आगरा की साझी विरासत पर प्रशासनिक ‘ग्रहण’: पालीवाल पार्क से आखिर क्यों गायब हुआ ऐतिहासिक होली मिलन?

आगरा। ताजनगरी की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रहा ‘पालीवाल पार्क सर्वसमाज होली मिलन समारोह’ इस वर्ष अचानक गायब रहने से शहरवासियों में गहरा रोष है। होली के दूसरे दिन भैया दूज पर दशकों से आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आगरा के आपसी सौहार्द और साझा विरासत का […]

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ताज की छाया में ‘पर्यटन की पाठशाला’: क्या आगरा बनेगा भारत की ‘हॉस्पिटैलिटी कैपिटल’?

केंद्रीय बजट में घोषित राष्ट्रीय हॉस्पिटैलिटी अकादमी के लिए आगरा सबसे व्यावहारिक और प्रतीकात्मक विकल्प बनकर उभर रहा है। विश्व धरोहर ताज महल की मौजूदगी और प्रतिवर्ष लाखों पर्यटकों की आमद इसे जीवंत प्रशिक्षण प्रयोगशाला बनाती है। गोल्डन ट्राएंगल सर्किट, मजबूत संपर्क व्यवस्था और विकसित होटल उद्योग अकादमी को वैश्विक स्तर दे सकते हैं। यदि […]

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यूपी में सतरंगी होली: ब्रज की भक्ति और काशी की मस्ती में डूबा प्रदेश, दिखा समरसता का अद्भुत संगम

लखनऊ: फाल्गुन की पूर्णिमा के साथ ही उत्तर प्रदेश रंगों के एक विराट महाकुंभ में तब्दील हो गया। गांव की चौपालों से लेकर महानगरों की चकाचौंध तक, हर जगह बस गुलाल और लोकगीतों की गूंज रही। यह होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि यूपी की सांस्कृतिक विरासत और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का जीवंत प्रमाण बनकर […]

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एक्सप्रेसवे पर रफ्तार नहीं, सुरक्षित सफर की जरूरत; केवल अपील से नहीं, कठोर नीति से बचेंगी जानें

आगरा/मथुरा। मंगलवार को तड़के सवा चार बजे यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर देर रात और तड़के के समय इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर हादसे अधिक क्यों होते हैं। यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक लगातार उभरती प्रवृत्ति है, जो सख्त नीति […]

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सूखी यमुना, सिसकता ताज: 41 साल से फाइलों में कैद है आगरा की ‘जीवनरेखा’, अब बैराज ही आखिरी उम्मीद

ताजमहल के पीछे बहने वाली यमुना दशकों से सूखी पड़ी है, जिससे ताज की नींव, पर्यावरण और आगरा का भविष्य खतरे में है। नगला पैमा में प्रस्तावित बैराज 1986-87 से लंबित है, जबकि सभी तकनीकी और नीतिगत स्वीकृतियां मिल चुकी हैं। बैराज ही जल संकट, भूजल गिरावट और शहरी पुनर्जीवन का स्थायी समाधान है। अब […]

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