भावनात्मक शोषण की सामाजिक हकीकत: क्यों रिश्तों में मौन रहने वाला ही सबसे अधिक आहत होता है?

मनुष्य का जीवन रिश्तों के ताने-बाने से ही आकार लेता है। परिवार, मित्रता, प्रेम, सहयोग और सामाजिक संबंध—ये सभी हमारे अस्तित्व को अर्थ प्रदान करते हैं। किंतु आज के समय की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि रिश्तों में संवेदनशीलता की जगह स्वार्थ ने ले ली है और भावनाओं को कमजोरी समझा जाने लगा है। […]

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एमपी विधानसभा चुनाव 2028: क्या ‘लाड़ली बहना’ और ‘किसान कल्याण’ फिर बनेंगे भाजपा का कवच?

भारतीय राजनीति इस समय लाभार्थी योजनाओं और गारंटी आधारित राजनीति के दौर से गुजर रही है। चुनावी विमर्श अब केवल विचारधारा, संगठन या भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे इस सवाल पर टिक गया है कि आम नागरिक के जीवन में कौन-सी योजना कितना ठोस, निरंतर और भरोसेमंद लाभ पहुंचा रही है। मध्य प्रदेश […]

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वेनेज़ुएला पर अमेरिका के सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ़्तारी सही या गलत : एक वैश्विक विवाद

इंदौर: वैश्विक राजनीति में एक नया, बेहद विवादास्पद तथा इतिहास बनाने वाला अध्याय जुड़ गया है। 3 जनवरी 2026 की रात अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला की राजधानी कराकास पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया और मात्र आधे घंटे के भीतर वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ़्तार […]

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मोबाइल की दुनिया और रिश्तों का एकांत: क्यों अब घर से ज्यादा वृद्धाश्रमों में सुकून ढूंढ रहे हैं बुजुर्ग?

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के दुर्गापुर स्थित आवास में सेवानिवृत्त जिला विकलांग अधिकारी जावेद फारुकी (65) का शव बिस्तर पर मिलना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के भीतर पल रहे गहरे अकेलेपन की भयावह तस्वीर पेश करता है। यह घटना उस सामाजिक ढांचे पर सवाल खड़े करती है, जहां लोग भीड़ […]

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118 साल बाद भी ज़िंदा है ‘पूस की रात’, खेत से निकलकर फुटपाथ तक पहुंची ठंड की कहानी

आगरा। यह 17 साल का सोनू है—जिसकी उम्र से कहीं ज़्यादा भारी उसकी ज़िंदगी है। तीन साल पहले एक सड़क हादसे ने उससे मां-बाप दोनों छीन लिए। आज न घर है, न छत और न कोई स्थायी सहारा। महात्मा गांधी मार्ग के फुटपाथ पर लगभग बुझ चुकी आग के पास बैठा सोनू अपने बदन में […]

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व्यंग्य: ​अंधेर नगरी का नया ‘प्रदूषण’ अध्याय; जहाँ तंदूर गुनहगार है और धुआं कारोबार!

न्याय पालिका ने हाल ही में राज सभा और संबंधित अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए एक बड़ा ही ‘अजीब’ सवाल पूछ लिया। कोर्ट ने पूछा कि जब इंद्रप्रस्थ की हवा ‘इमरजेंसी’ के दौर से गुजर रही है और लोग सांस के बदले जहर फांक रहे हैं, तो एयर प्यूरीफायर जैसी जीवनरक्षक मशीन पर […]

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छूटी हुई पाठशाला, छिनते सपने: स्कूल के बाहर खड़ी आधी आबादी…जब बेटियाँ बीच रास्ते लौट आती हैं

भारत में लड़कियों की स्कूली शिक्षा की कहानी आज़ादी के बाद के विकास‑वृत्तांत की सबसे जटिल और मार्मिक कड़ी है। संविधान का अनुच्छेद 21A हर बच्चे को 6 से 14 वर्ष तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है, पर ज़मीनी तस्वीर बताती है कि जैसे‑जैसे कक्षा बढ़ती है, लड़कियों की संख्या कम होती […]

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पुनर्जीवित अरावली अब पुनः विनाश की दिशा में है

अरावली बचाओ आंदोलन ने देश को पानीदार बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी। 80 के दशक में जब पूरा अरावली खनन के दबाव में पिस रहा था, तब पश्चिम की हवा के साथ अरावली के 12 गैप में से रेत दिल्ली की तरफ बढ़ रही थी। 10 साल के बाद जब 1991 में अरावली की […]

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संसद में बहस का असली मुद्दा: शोर और प्रतीकों से आगे, जनता की ज़िंदगी से जुड़े सवाल

लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है, बल्कि जनता की रोज़मर्रा की तकलीफों को सत्ता के सबसे ऊँचे मंच तक पहुँचाने की प्रक्रिया है। भारत में यह मंच संसद है, जहाँ हर चर्चा का केंद्र जनता की समस्याएँ और उनके समाधान होने चाहिए। दुर्भाग्यवश, बीते वर्षों में संसद की बहसें कई बार ऐसे विषयों […]

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आतंकवाद आधुनिक समय की जटिल चुनौती, विश्वभर की सरकारों और समाज पर गहरा प्रभाव

आतंकवाद आधुनिक समय की सबसे जटिल और गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है। इसने न केवल विश्वभर की सरकारों की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि समाज और मानवीय संरचना को भी गहराई तक झकझोर दिया है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि आतंकवादी गतिविधियों में आर्थिक रूप से कमजोर, […]

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