आगरा: DEI में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर मंथन—’बुद्धि और बाजार’ के बीच सेतु बनेगा AI, भविष्य की चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने दिया मंत्र

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आगरा। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) के शिक्षा संकाय स्थित एसओई सेमिनार हॉल में शुक्रवार को तकनीक और भविष्य के तालमेल पर आधारित एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ। ‘एआई इनोवेशन: बुद्धि और बाजार का सेतु’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने एक सुर में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल एक तकनीकी शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह भविष्य के आर्थिक विकास और रोजगार की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।

तकनीक और उद्योग के दिग्गजों ने साझा किए विचार

​यह कार्यक्रम डीईआई के फुटवियर टेक्नोलॉजी और कृषि इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ‘इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया)’ के सहयोग से आयोजित किया गया। सेमिनार में उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों ने एआई के व्यावहारिक उपयोग पर प्रकाश डाला:

​सप्लाई चेन में एआई: अमेरिका से आईं ग्लोबल कैटेगरी डायरेक्टर (प्रोक्योरमेंट) मीता सत्संगी ने बताया कि कैसे एआई डेटा के जरिए लॉजिस्टिक्स को आसान बनाकर सप्लाई चेन की दक्षता बढ़ा रहा है।

​करियर और नैतिकता: ज़ेनविव वेलनेस के सीईओ सुमित पुरी ने तकनीकी कौशल के साथ-साथ नैतिक दृष्टिकोण (Ethics) पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को भविष्य के करियर के लिए तैयार रहने के टिप्स दिए।

​फुटवियर इंडस्ट्री में बदलाव: ‘आइडनहाइव टेक्नोलॉजीज’ के निदेशक गुर दयाल भटनागर ने बताया कि फुटवियर डिजाइनिंग और विनिर्माण में एआई के प्रयोग से बड़ी क्रांति आने वाली है।

​डेटा एनालिटिक्स: करियर कोच अचराज प्रकाश ने डेटा एनालिटिक्स को भविष्य का सबसे डिमांडिंग स्किल बताया।

​नवाचार को बाजार से जोड़ने की पहल

​कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोध और नए विचारों को बाजार के उपयोगी उत्पादों में बदलना था। संस्थान के मुख्य संरक्षक प्रो. सी. पटवर्धन और संरक्षक प्रो. डी. के. चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में हुए इस आयोजन में 150 से अधिक छात्रों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

​सफल आयोजन और समन्वय

सेमिनार का सफल संचालन आयोजन सचिव डॉ. अशोक यादव, डॉ. अतुल दयाल और अर्जुन वर्मा ने किया। आयोजन समिति में डॉ. अंजिता कृष्णा, डॉ. प्रियंका गुंजन सहित छात्र समिति के यश उपाध्याय और आर्यन वर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और विश्वविद्यालय गीत के साथ हुआ, जिसने छात्रों को तकनीकी दुनिया के नए अवसरों से रूबरू कराया।