भाजपा सांसद कंगना रनौत मामला: आगरा की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में 20 मई को होगी दोनों पक्षों के बीच आर-पार की बहस

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आगरा, 19 मई। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ किसानों के कथित अपमान और राजद्रोह से जुड़े बेहद चर्चित मामले में 20 मई का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। आगरा स्थित विशेष एमपी-एमएलए अदालत (Special Court MP/MLA) के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में 20 मई इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर दोनों पक्षों की अंतिम और निर्णायक बहस सुनी जाएगी।

फैसले की तारीखों और प्रार्थना पत्र का पूरा घटनाक्रम

इस कानूनी विवाद की कड़ियों पर नजर डालें तो विगत 3 अप्रैल 2026 को अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखते हुए निर्णय के लिए 16 अप्रैल 2026 की तारीख मुकर्रर की थी। हालांकि, उस नियत तिथि पर कोर्ट द्वारा कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया जा सका, जिसके बाद अदालत ने आदेश पारित करने के लिए आगामी 30 अप्रैल 2026 की नई तारीख तय कर दी थी।

इसी बीच, मामले में एक नया मोड़ तब आया जब 21 अप्रैल 2026 को बिना किसी पूर्व निर्धारित तिथि के, विपक्षया कंगना रनौत की मुख्य अधिवक्ता अनसूया चौधरी की ओर से उनकी जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान के माध्यम से कोर्ट में एक विशेष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। इस प्रार्थना पत्र में दावा किया गया था कि अदालत द्वारा वादी पक्ष को 16 अप्रैल 2026 को ‘इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट’ (IT Act) पर बहस करने की अनुमति दी गई थी और वादी को केस फाइल को ‘मार्क’ करने का अवसर प्रदान किया गया था, जो कि वादी के पक्ष में एकतरफा और महत्वपूर्ण लाभ है। इसी आधार पर विपक्षी पक्ष ने अदालत से आग्रह किया था कि 30 अप्रैल 2026 को मामले में कोई अंतिम निर्णय न सुनाया जाए, क्योंकि वे कोर्ट के समक्ष कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रपत्र (दस्तावेज) प्रस्तुत करना चाहती हैं।

वादी रमाशंकर शर्मा एडवोकेट का तीखा पलटवार

​विपक्षी पक्ष के इस कदम पर पलटवार करते हुए वादी और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने 30 अप्रैल 2026 को अदालत में अपना लिखित जवाब दाखिल किया। अपने जवाब में उन्होंने विपक्षी पक्ष के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्षया ने माननीय न्यायालय की निष्पक्ष न्याय प्रणाली पर पूरी तरह बेबुनियाद और झूठे आरोप लगाए हैं।

एडवोकेट रमाशंकर शर्मा ने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए कोर्ट को बताया कि 16 अप्रैल 2026 को न तो आईटी एक्ट पर कोई नई बहस हुई थी और न ही फाइल पर कोई मार्किंग की गई थी। असल में, केवल पत्रावली (केस फाइल) के कुछ प्रमुख और जरूरी दस्तावेजों पर ‘फ्लैग’ (चिह्न) लगाने की मौखिक अनुमति माननीय न्यायालय से मांगी गई थी।

अदालत ने अपने पेशकार और विपक्षया की जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान की प्रत्यक्ष मौजूदगी में ही फ्लैग लगाने की इजाजत प्रदान की थी। कोर्ट के इसी मौखिक आदेश पर पेशकार और विपक्षी वकील के सामने कुछ चुनिंदा प्रपत्रों पर फ्लैग लगाए गए थे। यही नहीं, स्वयं सुधा प्रधान के कहने पर वादी द्वारा अपने दस्तावेजों के साथ-साथ विपक्षी पक्ष द्वारा फाइल में लगाए गए प्रपत्रों पर भी फ्लैग लगवाए गए थे।

अदालत ने 20 मई के लिए तय की बहस की तिथि

विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की मौखिक दलीलें सुनने, उनके आचरण को देखने और दोनों तरफ से दाखिल किए गए प्रार्थना पत्रों का गहन अवलोकन करने के बाद बड़ा फैसला लिया था। अदालत ने विपक्षी पक्ष (कंगना रनौत की टीम) के निवेदन को स्वीकार करते हुए 30 अप्रैल को अपना निर्णय टाल दिया था और उन्हें कुछ अन्य आवश्यक दस्तावेज कोर्ट के रिकॉर्ड पर दाखिल करने का अंतिम अवसर प्रदान किया था। इसके साथ ही, माननीय न्यायाधीश ने आज की तारीख (20 मई 2026) को इस मामले में पुनः दोनों पक्षों की अंतिम बहस के लिए नियत कर दिया था। आज होने वाली इस न्यायिक जिरह पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हल्के की नजरें टिकी हुई हैं।