पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर IMF की बड़ी चेतावनी: ज्यादा दिन तक दाम दबाए रखना नामुमकिन, बाजार के हवाले करें कीमतें

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नई दिल्ली: ​पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद देश में एक बार फिर आर्थिक मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ी चिंता का विषय पेट्रोल और डीजल की कीमतें हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी उछाल के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत सरकार को एक कड़ी सलाह दी है।

आईएमएफ का कहना है कि भारत को अब वैश्विक वास्तविकताओं के आधार पर ईंधन की कीमतों को बाजार के हवाले कर देना चाहिए, क्योंकि इन्हें लंबे समय तक कृत्रिम रूप से दबाए रखना अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

​कच्चे तेल का बिगड़ा समीकरण

पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें, जो कभी 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, अब 100 से 126 डॉलर के बीच झूल रही हैं। इस बढ़ोतरी का सीधा बोझ सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ रहा है। कंपनियों ने खुदरा कीमतें स्थिर रखने के लिए घाटा सहा है, लेकिन आईएमएफ के मुताबिक, यह नीति अब ‘राजकोषीय बोझ’ बन सकती है।

​आईएमएफ की दलील: “कीमतें बढ़ेंगी तो कम होगी खपत”

आईएमएफ के एशिया-प्रशांत निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा कि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती और उर्वरक सब्सिडी के जरिए राहत तो दी है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। आईएमएफ का मानना है कि जब ऊर्जा महंगी होगी, तभी लोग खपत कम करेंगे, जिससे वैश्विक मांग और आपूर्ति में संतुलन बनेगा। उन्होंने व्यापक सब्सिडी के बजाय केवल जरूरतमंद तबके को ‘टारगेटेड कैश ट्रांसफर’ देने की सिफारिश की है।

​RBI और सरकार का पलटवार

हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने आईएमएफ के इस नजरिए से असहमति जताई है। उन्होंने भारत की मजबूत राजकोषीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि भारत का कर्ज अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) 2031 तक गिरकर 77.7% होने का अनुमान है। उन्होंने जोर दिया कि भारत का आर्थिक प्रबंधन आईएमएफ के अनुमानों से कहीं अधिक बेहतर और सहनशील है।

​क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

संकेत मिल रहे हैं कि तेल कंपनियां धीरे-धीरे बोझ कम करने की तैयारी में हैं। कमर्शियल एलपीजी (19 किलो) की कीमतों में हालिया भारी बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के लिए जेट फ्यूल के दाम बढ़ाया जाना इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह आम जनता को महंगाई से बचाए रखे या आईएमएफ की सलाह मानकर बाजार को कीमतें तय करने दे।