मथुरा: उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी ‘सारस क्रेन’ और पारिस्थितिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण ‘ग्रेटर फ्लेमिंगो’ (राजहंस) मथुरा में अलग-अलग हादसों का शिकार हो गए। उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षियों को रेस्क्यू किया। वर्तमान में दोनों का उपचार संस्था की ट्रांजिट फैसिलिटी में चल रहा है।
तार की फेंसिंग में घायल हुआ सारस
हादसे का पहला मामला मथुरा के लक्ष्मी नगर का है। यहाँ एक खेत में लगा कटीला तार (फेंसिंग) एक सारस क्रेन के लिए काल बन गया। दाहिना पंख फंसने के कारण पक्षी गंभीर रूप से घायल हो गया था। किसानों की सूचना पर पहुँची टीम ने देखा कि पंख की हड्डी को काफी नुकसान पहुँचा है। घाव तो भर रहे हैं, लेकिन हड्डी की रिकवरी के लिए गहन उपचार जारी है। उचित समय पर ही इसे दोबारा प्राकृतिक आवास में छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा।
भीषण गर्मी से बेहाल हुआ नन्हा फ्लेमिंगो
दूसरा रेस्क्यू सेना के छावनी क्षेत्र से किया गया। यहाँ एक छोटा फ्लेमिंगो अत्यधिक तापमान और निर्जलीकरण (Dehydration) के कारण उड़ने में असमर्थ होकर गिर पड़ा था। सेना के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए इसे वन विभाग पहुँचाया, जहाँ से इसे वाइल्डलाइफ एसओएस के अस्पताल भेजा गया। पक्षी को फिलहाल मल्टीविटामिन सप्लीमेंट और विशेष पोषण दिया जा रहा है।
जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं ये प्रजातियां
सारस क्रेन दुनिया का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी है और IUCN की रेड लिस्ट में ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी में आता है। वहीं, ग्रेटर फ्लेमिंगो वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन दोनों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत सुरक्षा प्राप्त है।
विशेषज्ञों का संदेश
वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने सेना, किसानों और वन विभाग का आभार जताते हुए कहा कि जनता की सतर्कता से ही इन अनमोल पक्षियों का उपचार संभव हो पाया। वहीं, डायरेक्टर बैजू राज एम.वी. ने जोर दिया कि जब समाज वन्यजीवों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझता है, तभी महत्वपूर्ण जीवन बचाए जा सकते हैं।
Up18 News अपने पाठकों से अपील करता है कि गर्मी के इस मौसम में अपने घरों की छतों या बालकनी में पक्षियों के लिए पानी रखना न भूलें, आपकी एक छोटी सी कोशिश किसी बेजुबान की जान बचा सकती है।

