आगरा में राज्य महिला आयोग अध्यक्ष का बड़ा फैसला: मुस्लिम महिलाओं के लिए बनेगा स्पेशल ऐप, घर बैठे दर्ज होंगी शिकायतें

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आगरा: ताजनगरी के सर्किट हाउस में मंगलवार को आयोजित महिला जनसुनवाई में घरेलू हिंसा की कड़वी सच्चाई सामने आई। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बड़ी संख्या में पहुँची महिलाओं की फरियाद सुनी और मौके पर ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को निस्तारण के आदेश दिए। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक सीमाओं को देखते हुए एक विशेष मोबाइल ऐप लॉन्च करने का ऐतिहासिक ऐलान किया।

​घरेलू हिंसा के मामलों ने बढ़ाई चिंता

जनसुनवाई के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए डॉ. बबीता चौहान ने बताया कि आगरा से आने वाली शिकायतों में सबसे बड़ी संख्या ‘घरेलू हिंसा’ की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दे महज आंकड़े नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक सच्चाई हैं। आयोग यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर पीड़ित महिला की बात सुनी जाए और उसे न्याय मिले।

मुस्लिम महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है अलग ऐप?

मुस्लिम महिलाओं की समस्याओं पर विशेष ध्यान देते हुए अध्यक्ष ने कहा, “हमने महसूस किया है कि जो मुस्लिम महिलाएं एक बार शिकायत लेकर आती हैं, वे दोबारा आयोग तक नहीं पहुँच पातीं। उन्हें घर से बाहर निकलने पर पारिवारिक और सामाजिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। कई महिलाओं ने खुद बताया कि एक बार शिकायत करने के बाद उन्हें घर में कैद कर दिया जाता है।”

​इसी समस्या के समाधान के रूप में आयोग एक विशेष ऐप तैयार करवा रहा है। इस ऐप के जरिए मुस्लिम महिलाएं बिना घर से बाहर निकले सीधे राज्य महिला आयोग और पुलिस से संपर्क कर सकेंगी। उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

​न्यायालय और पुलिस के बीच सेतु बनेगा आयोग

डॉ. चौहान ने स्पष्ट किया कि कई मामले कोर्ट में लंबित होने के कारण पुलिस हाथ नहीं डाल पाती, लेकिन आयोग अपनी सीमाओं के भीतर हर संभव समाधान निकालता है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि आयोग के पास आने वाले हर केस का निस्तारण हमारी प्राथमिकता है और किसी भी हाल में महिलाओं की आवाज दबने नहीं दी जाएगी।

जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में पीड़ित महिलाएं अपनी आपबीती लेकर पहुँची थीं, जिन्हें अध्यक्ष ने धैर्यपूर्वक सुना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल एक्शन लेने के लिए निर्देशित किया।