मुंबई (अनिल बेदाग): सिनेमा के पर्दे पर अक्सर मनोरंजन की चकाचौंध दिखती है, लेकिन कभी-कभी ऐसी कहानियाँ भी आती हैं जो रूह को झकझोर देती हैं। औशिम खेतरपाल की आगामी फिल्म ‘चिल्ड्रन ऑफ गॉड’ कुछ ऐसी ही संवेदनाओं को समेटे हुए है। फिल्म का पहला पोस्टर रिलीज होते ही फिल्म गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि यह फिल्म पहचान की लड़ाई, सामाजिक तिरस्कार और खुद को अपनाने की एक बेहद मर्मस्पर्शी यात्रा होने वाली है।
साईं भक्ति से सामाजिक सरोकार तक का सफर
साईं बाबा पर आधारित प्रोजेक्ट्स के जरिए घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाले औशिम खेतरपाल इस बार एक बिल्कुल अलग और साहसी विषय के साथ लौटे हैं। फिल्म के निर्देशक आशीष सक्सेना का मानना है कि यह फिल्म कोरी कल्पना नहीं, बल्कि कड़वी सच्चाई का दस्तावेज है। उनके अनुसार, पूरी टीम ने इस कहानी की गरिमा बनाए रखने के लिए इसे बेहद ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा है।
’अमित से अमिता’ बनने का संघर्ष
फिल्म के केंद्र में है ‘अमित’ का किरदार, जो ‘अमिता’ बनने के अपने सफर में दर्द, समाज की नफरत और अकेलेपन से गुजरता है। यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की ‘कमिंग-ऑफ-एज’ कहानी है, जो अंततः खुद को स्वीकार करने का साहस जुटाता है। फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता आकाश वर्मा ने इसे अपने करियर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताया है। आकाश का कहना है कि यह किरदार उन अनगिनत लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है, जिनकी आवाज़ अक्सर दबकर रह जाती है।
इंसानियत और साहस का पैगाम
औशिम खेतरपाल ने फिल्म के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा, “खुद को स्वीकार करना ही दुनिया का सबसे बड़ा साहस है। यह फिल्म उन लोगों की सच्चाई है जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है।” ‘चिल्ड्रन ऑफ गॉड’ एक सोशल ड्रामा होने के साथ-साथ प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत है, जो दर्शकों को सहानुभूति और इंसानियत का एक नया नजरिया देने का वादा करती है।

