आगरा में जमीन माफियाओं का दुस्साहस: 18 साल पुराने मकान को फर्जी दस्तावेजों से बेचा, कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ केस

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आगरा। शहर में भूमि माफियाओं का एक भयावह चेहरा सामने आया है, जहाँ एक बेसहारा महिला की 18 वर्षों की मेहनत और उसके आशियाने को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने की साजिश रची गई। मामला थाना जगदीशपुरा क्षेत्र का है, जहाँ एक गरीब महिला द्वारा वर्ष 2007 में खरीदे गए मकान को जालसाजों ने कूटरचित कागजात तैयार कर चुपके से बेच दिया।

पीड़िता का आरोप है कि न केवल उसकी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया गया, बल्कि विरोध करने पर उसे प्रताड़ित कर शारीरिक चोटें भी पहुँचाई गईं। स्थानीय पुलिस की उदासीनता के बाद, पीड़िता ने अधिवक्ता नरेश पारस के माध्यम से न्यायालय की शरण ली। अदालत ने मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए 173(4) बीएनएसएस के तहत थाना जगदीशपुरा को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।

फर्जीवाड़े का जाल और मालिकाना हक पर हमला

पीड़िता का कहना है कि उसने 4 जून 2007 को यह जमीन खरीदी थी, जिस पर एक कमरा भी बना हुआ है। पिछले 18 वर्षों से वह निरंतर उस संपत्ति पर अपना मालिकाना हक रखती आई है। हालांकि, कुछ शातिर तत्वों ने इस संपत्ति पर नजर गड़ाई और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे किसी अन्य को बेचने का सौदा कर दिया। जब महिला को इस धोखे की भनक लगी, तो उसने इसका पुरजोर विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप उसे जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।

​दबाव, मारपीट और प्रताड़ना की कहानी

पीड़िता के अनुसार, आरोपी उसे संपत्ति से बेदखल करने के लिए लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव बना रहे थे। यह प्रताड़ना तब चरम पर पहुँच गई जब 10 दिसंबर 2025 को विपक्षी दल के लोग जबरन उसके घर में घुस आए। उन्होंने मकान को तुरंत खाली करने का दबाव बनाया और विरोध करने पर महिला के साथ मारपीट की गई। भयभीत पीड़िता ने स्थानीय पुलिस चौकी में गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई न होने के कारण उसे न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

​न्यायालय का सख्त रुख और पुलिस की कार्रवाई

अधिवक्ता नरेश पारस ने न्यायालय को अवगत कराया कि पीड़ित महिला को न्याय दिलाने में स्थानीय पुलिस नाकाम रही, जिसके बाद अदालत ने इस कृत्य को गंभीर अपराध मानते हुए पुलिस को तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। न्यायालय के आदेशों के पालन में पुलिस ने पप्पू, तुलसा, लक्ष्मी, राधेश्याम और मोनू (सभी निवासी नई आबादी, रामनगर, थाना जगदीशपुरा) के खिलाफ गंभीर धाराओं में नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है।

​पुलिस की जांच का दायरा

वर्तमान में, जगदीशपुरा थाना पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है। पुलिस द्वारा उस संपत्ति से जुड़ी मूल रजिस्ट्री, कथित फर्जी दस्तावेज और जमीन के लेनदेन की प्रक्रिया का बारीकी से सत्यापन किया जा रहा है। आरोपियों द्वारा किस तरह से कागजातों में हेराफेरी की गई, इसे लेकर पुलिस अब उनकी भूमिका की पूरी कुंडली खंगाल रही है ताकि मामले के पीछे के असली मास्टरमाइंड को बेनकाब किया जा सके।