आगरा, 16 मई 2026। ताजनगरी के ग्रामीण अंचल से ईमानदारी, इंसानियत और आपसी विश्वास की एक ऐसी सुखद तस्वीर सामने आई है, जिसने समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (रोडवेज) की एक बस में सफर कर रही दो महिलाओं के बैग आपस में अनजाने में बदल गए थे। एक बैग में करीब 10 लाख रुपये के सोने के कीमती आभूषण थे। लेकिन, लालच को दरकिनार कर दूसरी महिला ने पूरी ईमानदारी के साथ वह बैग असली मालकिन को सौंप दिया, जिससे एक रोता-बिलखता परिवार वापस मुस्कुरा उठा।
बस के सफर में अनजान महिलाओं के बीच हो गई बड़ी चूक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगरा के ग्राम फरेरा मुड़ियापुरा की रहने वाली भोजवती (पुत्रवधु भीकम सिंह) शुक्रवार की शाम को एक रिश्तेदारी से रोडवेज बस द्वारा अपने घर लौट रही थीं। इत्तेफाक से, उसी बस में पिढ़ौरा के गांव चंडीशाल की निवासी मंजू देवी भी अपने मायके जाने के लिए सवार हुई थीं। दोनों महिलाएं एक-दूसरे के लिए पूरी तरह अनजान थीं और पास-पास ही बैठी हुई थीं। बस का सफर खत्म होने के बाद जब दोनों अपने-अपने गंतव्य पर उतरने लगीं, तो जल्दबाजी में दोनों के एक जैसे दिखने वाले बैग आपस में बदल गए, जिसका अहसास उस वक्त किसी को नहीं हुआ।
जब बदला हुआ बैग खुला, तो उड़ गए होश
मंजू देवी जब बसई अरेला क्षेत्र के स्याहीपुरा चौराहे पर बस से नीचे उतरीं और अपना सामान व्यवस्थित करने लगीं, तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि उनके हाथ में जो बैग है, वह उनका नहीं बल्कि किसी और का है। मंजू देवी ने तुरंत वहां मौजूद स्थानीय ग्रामीणों को इस गड़बड़ी की जानकारी दी।
ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए मंजू देवी को सलाह दी कि वे बिना मालिक के उस बैग को अकेले में न खोलें और यहीं रुककर कुछ देर इंतजार करें कि शायद दूसरी सवारी अपने बैग को ढूंढते हुए यहां तक आए।
रोते-बिलखते चौराहे पर पहुंची भोजवती, मंजू बनीं ‘फरिश्ता’
ग्रामीणों का यह अंदाजा बिल्कुल सही साबित हुआ। महज कुछ ही देर बाद दूसरी महिला भोजवती अपने ससुर भीकम सिंह के साथ बदहवास हालत में, रोती-बिलखती हुई स्याहीपुरा चौराहे पर पहुंचीं। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को रोते हुए बताया कि बस में उनका बैग किसी से बदल गया है, जिसमें उनके जीवन भर की पूंजी रखी हुई थी।
यह सुनते ही मंजू देवी तुरंत आगे आईं और उन्होंने बिना एक पल गंवाए वह बैग भोजवती को सौंप दिया। जब बैग को सबके सामने खोला गया, तो उसमें चमचमाते हुए करीब 10 लाख रुपये मूल्य के सोने के भारी आभूषण सुरक्षित रखे थे।
अपने सोने के गहनों को सुरक्षित देखकर भोजवती की आंखों में खुशी के आंसू आ गए और उन्होंने राहत की गहरी सांस ली। मौके पर मौजूद दर्जनों ग्रामीणों ने मंजू देवी के इस निस्वार्थ और ऊंचे चरित्र की जमकर सराहना की और कहा कि ऐसे लोग ही समाज में अच्छाई को जिंदा रखते हैं।


