ईरान संकट के बीच भारत को ‘अमेरिकी सुरक्षा कवच’: रूसी तेल खरीद के लिए मिली 30 दिनों की विशेष छूट

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आवाजाही ठप होने के कारण गहराते ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरीज को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थाई मोहलत (Waiver) दे दी है। इस फैसले से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल और सप्लाई की किल्लत का खतरा टल गया है।

​ट्रंप प्रशासन का ‘एनर्जी एजेंडा’ और भारत का साथ

​अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस फैसले की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट को बंधक बनाने की ईरान की कोशिशों के जवाब में यह कदम उठाया गया है। बेसेंट के मुताबिक, “भारत अमेरिका का एक अहम रणनीतिक साझेदार है। यह अस्थाई उपाय वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव कम करने के लिए किया गया है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे रूस को कोई नया वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि यह केवल समुद्र में पहले से मौजूद तेल के लेनदेन तक सीमित है।

​क्यों जरूरी थी यह छूट?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत आयात करता है। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें 20 फीसदी तक उछल गई थीं। चूंकि दुनिया की 20 फीसदी और भारत की करीब 50 फीसदी तेल सप्लाई इसी रास्ते से होती है, इसलिए सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई थी। ऐसे में रूसी तेल ही एकमात्र विकल्प बचा था, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अनिश्चितता बनी हुई थी।

​महंगा हुआ रूसी तेल, फिर भी मजबूरी

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सरकारी रिफाइनरीज ने पहले ही रूस से करीब 20 मिलियन बैरल तेल की खरीद शुरू कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि जो रूसी तेल फरवरी में 13 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट पर मिल रहा था, अब वह ब्रेंट क्रूड से 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम (महंगे दाम) पर मिल रहा है। संकट की स्थिति में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारतीय कंपनियां इस कीमत पर भी तेल खरीदने को तैयार हैं।

मार्केट का हाल

​अमेरिका के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई है। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 83.72 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस 30 दिनों की छूट से भारतीय बाजार में स्थिरता आएगी और आम उपभोक्ताओं पर तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ कम होगा।