वॉशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट ने भारत और अमेरिका के राजनयिक संबंधों में हलचल मचा दी है। इस स्वतंत्र अमेरिकी एजेंसी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से सिफारिश की है कि भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं।
संपत्ति जब्त करने और वीजा बैन की सिफारिश
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में मांग की है कि आरएसएस की संपत्तियों को जब्त किया जाए और इसके सदस्यों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई जाए। 100 साल पुराने इस संगठन के कामकाज के तरीके पर आयोग ने गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही, भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ को भी निशाने पर लिया गया है। पिछले साल भी आयोग ने सिख अलगाववादियों से जुड़े मामलों में रॉ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रतिबंधों की बात कही थी।
हथियारों की बिक्री पर रोक की मांग
USCIRF ने केवल संगठनों पर ही नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका सैन्य संबंधों पर भी प्रहार किया है। सिफारिशों में कहा गया है कि कथित धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर भारत को हथियारों की बिक्री रोकी जानी चाहिए। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भविष्य के व्यापारिक और सैन्य संबंध केवल धार्मिक स्वतंत्रता की शर्तों के आधार पर ही तय होने चाहिए।
भारत ‘विशेष चिंता वाले देशों’ की सूची में शामिल
आयोग ने लगातार सातवें वर्ष भारत को ‘विशेष चिंता वाला देश’ (Country of Particular Concern – CPC) घोषित करने की सिफारिश की है। इस सूची में भारत के साथ पाकिस्तान, चीन, उत्तर कोरिया, अफगानिस्तान, म्यांमार और रूस जैसे 18 देशों के नाम शामिल हैं।
क्या है USCIRF और कितनी प्रभावी है रिपोर्ट?
USCIRF अमेरिका की एक स्वतंत्र संघीय एजेंसी है जो दुनिया भर में धार्मिक आजादी की निगरानी करती है। हालांकि, इसकी सिफारिशें व्हाइट हाउस या अमेरिकी विदेश मंत्रालय के लिए बाध्यकारी नहीं हैं। भारत सरकार ने पूर्व में भी ऐसी रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण और देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताकर खारिज किया है। अब देखना यह होगा कि डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।

