आगरा। आगरा स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील) के संरक्षण को लेकर उत्तर प्रदेश शासन और वन विभाग की एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है। राज्य सरकार द्वारा जारी ‘जीरो ईको सेंसिटिव जोन’ (ESZ) का गजट नोटिफिकेशन अब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की सख्ती के बाद वापस ले लिया गया है। इस मामले में यह स्पष्ट हुआ है कि राज्य सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अधिसूचना जारी की थी, जिससे न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि शीर्ष स्तर पर शासन को भी गुमराह किया गया।
अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर लिया था निर्णय
मामला पिछले वर्ष का है, जब उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्यपाल के माध्यम से सूर सरोवर पक्षी विहार के चारों ओर ‘जीरो ईको सेंसिटिव जोन’ घोषित कर दिया था। इस प्रस्ताव को आगरा वन विभाग द्वारा तैयार किया गया था और पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अधिसूचना जारी कर दी गई थी। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना था कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के विरुद्ध था, जो स्पष्ट करते हैं कि ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का एकमात्र अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की लड़ाई लाई रंग
आगरा के पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने इस निर्णय पर सबसे पहले आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से लेकर शासन स्तर तक इस अनियमितता को उजागर करने का प्रयास किया, लेकिन उस समय उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया। हार न मानते हुए डॉ. गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि राज्य सरकार ने मनमाने तरीके से जीरो ईको सेंसिटिव जोन तय किया है, जो वन्यजीवों के संरक्षण के लिए घातक है।
सीईसी के सामने निरुत्तर हुई सरकार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले को सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) को सौंपने के बाद सरकार की मुश्किलें बढ़ गईं। सीईसी की सुनवाई के दौरान जब सरकार से यह पूछा गया कि बिना कानूनी अधिकार के यह अधिसूचना कैसे जारी की गई, तो शासन के प्रतिनिधि कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी और आनन-फानन में अधिसूचना वापस ले ली गई। वन विभाग ने अब इस संबंध में 14 हेक्टेयर भूमि के नोटिफिकेशन के लिए न्यायालय से आठ सप्ताह का समय मांगा है।
केंद्र का फैसला आने तक 10 किमी का दायरा रहेगा सेंसिटिव
सीईसी ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि जब तक केंद्र सरकार सूर सरोवर पक्षी विहार के ईको सेंसिटिव जोन की अंतिम सीमा तय नहीं करती, तब तक पक्षी विहार की सीमा से 10 किलोमीटर तक के दायरे को ‘ईको सेंसिटिव जोन’ माना जाएगा। इस निर्णय का सीधा असर उस क्षेत्र में होने वाली निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक परियोजनाओं और अन्य पर्यावरणीय स्वीकृतियों पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मत: पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण
इस निर्णय पर पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने कहा, “वन विभाग के अधिकारी यह भूल गए थे कि प्रवासी पक्षी और जलीय जीव केवल बाउंड्री तक सीमित नहीं रहते। उनके संरक्षण के लिए 10 किलोमीटर का दायरा अनिवार्य है। सीईसी का यह आदेश सूर सरोवर की पारिस्थितिकी को बचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।”


