Agra News: बसंत की बेला में जनकवि नजीर को याद कर गूंजा साहित्य-संगीत, पुलिस आयुक्त दीपक कुमार बोले- “निराला और नजीर जिंदा रहेंगे तो देश की साहित्य आत्मा बची रहेगी”

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आगरा। बसंत पर्व की खुशबू और साहित्य की गरिमा के बीच ताजगंज स्थित शीरोज हैंगआउट में जनकवि नजीर अकबराबादी की जयंती पर “निराला-नजीर” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नजीर की रचनाओं के साथ-साथ राष्ट्रकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी उनके जन्मदिवस पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम में काव्य, संगीत और सांस्कृतिक चेतना का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने श्रोताओं को तीन घंटे से अधिक समय तक बांधे रखा।

मुख्य अतिथि पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आगरा की सांस्कृतिक पहचान “नजीर” से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि नज्म, गजल जैसी विधाएं आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हैं और नज्म को नजीर की मौलिक विधा के रूप में भी स्वीकार किया जाता है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि महाप्राण पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ छायावाद के कवि होते हुए भी जन की बात कहते थे। नजीर और निराला दोनों ने साहित्य को जनता के जीवन से जोड़ा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “निराला और नजीर जिंदा रहेंगे तो देश के साहित्य की आत्मा बची रहेगी।”

कार्यक्रम में डीआईजी आगरा परिक्षेत्र शैलेश शर्मा और डीसीपी नगर सैयद अली अब्बास की भी उपस्थिति रही।

नेताजी के तराने पर जोश से गूंजा सभागार

कार्यक्रम के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस पर आजाद हिंद फौज के प्रसिद्ध तराने “कदम कदम बढ़ाए जा” की प्रस्तुति हुई। इस गीत पर श्रोताओं ने जोश-ओ-खरोश के साथ सहभागिता निभाई और माहौल देशभक्ति से भर गया। आयोजकों ने बताया कि यह गीत वंशीधर शुक्ल द्वारा लिखा गया था और कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने इसे संगीतबद्ध किया था, जो आज भी भारतीय सेना के कई अवसरों पर बजाया जाता है।

अमृता विद्या और छांव फाउंडेशन की संगीत-श्रद्धांजलि

आयोजन अमृता विद्या-एजुकेशन फॉर इम्मोर्टालिटी सोसायटी और छांव फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। संगीत प्रस्तुतियों के बाद अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायक, बेगम अख्तर पुरस्कार और यूपी संगीत नाटक अकादमी सम्मान से अलंकृत सुधीर नारायण ने कहा कि वे वर्षभर देश-विदेश में कार्यक्रमों के लिए जाते हैं, लेकिन बसंत पर्व पर उनका प्रयास रहता है कि वे आगरा में रहकर नजीर को शहरवासियों के साथ याद कर सकें।

उनके साथ कलाकार खुशी सोनी, हर्षित पाठक, देशदीप शर्मा, सुरेश राजपूत, प्रीती कुमारी, अमन शर्मा, राज मैसी, राजू पाण्डेय आदि ने भी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कुन्दन सोप का विशेष सहयोग रहा।

सरस्वती वंदना से नजीर की रचनाओं तक, रही शानदार प्रस्तुति

कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना “वर दे वीणावादिनी” से हुई। इसके बाद निराला की रचना “सखी बसंत आया” को राग-रागेश्वरी में एक ताल बारह मात्रा में प्रस्तुत किया गया। नजीर की रचनाओं में “क्या क्या कहूं मैं कृष्ण कन्हैया का बालपन”, “जब लाद चलेगा बंजारा (बंजारा नामा)”, “रख ध्यान सुनो दंदोत करो जय बोलो कृष्ण कन्हैया की”, “सब की तो बसंते हैं पर यारों का बसंता” सहित अन्य रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। हजरत सलीम चिस्ती पर आधारित प्रस्तुति ने भी विशेष प्रभाव छोड़ा।

शीरोज हैंगआउट कैफे: संघर्ष से प्रेरणा तक का संदेश

अमृता विद्या सोसायटी के सचिव अनिल शर्मा ने कहा कि नजीर जनकवि थे और उन्होंने हमेशा आम जनता को जिंदगी की हकीकत बताकर जिंदादिली से जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शीरोज हैंगआउट कैफे भी सकारात्मक जीवन की प्रेरणा देने वाला प्रतिष्ठान है, जहां एसिड अटैक सर्वाइवर्स ने संघर्ष कर समाज की मुख्यधारा में जगह बनाई है। आयोजन के दौरान अतिथियों और श्रोताओं ने एसिड अटैक सर्वाइवर्स से संवाद कर उनके जीवन संघर्ष को भी जाना।

छांव फाउंडेशन के डायरेक्टर आशीष शुक्ला ने कहा कि आगरा की साझी विरासत को जीवित रखने में भागीदार बनना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए प्रेरणादायक होते हैं और उनमें साहित्यिक अभिरुचि भी विकसित हो रही है। उन्होंने बताया कि रुकईया नियमित रूप से कविता लिख रही हैं।

नजीर पर प्रस्तावित फिल्म का प्रोमो दिखाया गया

कार्यक्रम में अमृता विद्या की ओर से नजीर अकबराबादी पर प्रस्तावित फिल्म का प्रोमो भी प्रदर्शित किया गया। अनिल शर्मा ने बताया कि फिल्म की शूटिंग जल्द शुरू की जाएगी। यह बहुभाषी होगी और नजीर के देश-विदेश में फैले प्रशंसकों की भावनाओं के अनुरूप बनाई जाएगी।

मेट्रो स्टेशन का नाम नजीर के नाम पर रखने का प्रस्ताव

इस अवसर पर एक प्रस्ताव भी पारित किया गया कि ताजमहल मेट्रो स्टेशन या मल्को गली के आसपास स्थित किसी मेट्रो स्टेशन का नाम जनकवि नजीर अकबराबादी के नाम पर रखा जाए। यह प्रस्ताव शासन और महानगर से जुड़े जनप्रतिनिधियों को भेजने का निर्णय लिया गया।

तीन घंटे चला आयोजन, बड़ी संख्या में मौजूद रहे साहित्यप्रेमी

तीन घंटे से अधिक समय तक चले कार्यक्रम की अध्यक्षता पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने की और संचालन दिनेश श्रीवास्तव ने किया। आयोजन में मन्नू, अर्निका माहेश्वरी, विमल सोलंकी, आरिफ तैमूरी, राजीव सक्सेना, असलम सलीमी, ब्रिग विनोद दत्ता, विधु दत्ता, रुनु सरकार, डॉ. आभा चतुर्वेदी, ग्रुप कैप्टन डॉ. कुंवर जय पल सिंह चौहान, आशा चौहान, भुवेश शर्मा, परवेज कबीर, डॉ. डी.वी. शर्मा, शिव दयाल शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक और शीरोज हैंगआउट कैफे की एसिड अटैक सर्वाइवर्स उपस्थित रहीं।