आगरा:..शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) की जमीनी हकीकत ताजनगरी में बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश देने में स्कूलों की मनमानी और विभागीय शिथिलता के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पैरेंट्स अवेयर्स (पापा संस्था) द्वारा अशोक नगर स्थित बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय में आयोजित ‘आरटीई सहायता कैंप’ में व्यवस्था की कलई खुलकर सामने आ गई।
स्कूलों का ‘बहाना’: सूची नहीं मिली, जबकि विभाग कह रहा ‘भेज दी’
कैंप में आई शिकायतों में सबसे चौंकाने वाला खुलासा स्कूल आवंटन को लेकर हुआ। कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि आवंटन पत्र होने के बावजूद स्कूल प्रबंधन बच्चों को दाखिला नहीं दे रहा है। स्कूल प्रशासन का तर्क है कि उन्हें विभाग की ओर से आधिकारिक सूची प्राप्त नहीं हुई है, जबकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि सूचियां पहले ही भेजी जा चुकी हैं। विभाग और स्कूलों के बीच की इस खींचतान में मासूम बच्चों की पढ़ाई अधर में लटकी है।
दूरी और लंबित राशि: आर्थिक बोझ तले दबे अभिभावक
कैंप के दौरान दो अन्य प्रमुख समस्याएं भी उजागर हुईं:
स्कूलों की दूरी: आरटीई के तहत बच्चों को 3 से 4 किलोमीटर दूर स्थित स्कूल आवंटित कर दिए गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों को इतनी दूर भेजना और परिवहन का खर्च उठाना नामुमकिन साबित हो रहा है।
रुकी हुई प्रतिपूर्ति: कई अभिभावक ऐसे हैं जिनके बच्चों का प्रवेश 2-3 साल पहले हुआ था, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि (Reimbursement) आज तक उनके खातों में नहीं पहुँची है।
40 मामलों का संकलन, 3 दिन का अल्टीमेटम
कैंप कोऑर्डिनेटर ईरम और सदस्य प्राप्ति, मनन व दर्शित ने कुल 40 गंभीर शिकायतों को सूचीबद्ध किया है। संस्था के संस्थापक दीपक सिंह सरीन ने इन सभी शिकायतों को खंड शिक्षा अधिकारी (नगर) सुमित कुमार सिंह को सौंपा। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि 3 दिन के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और बच्चों के प्रवेश सुनिश्चित नहीं किए गए, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
”आरटीई बच्चों का मौलिक अधिकार है। स्कूलों की मनमानी और विभाग की लापरवाही के कारण किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।” — दीपक सिंह सरीन, संस्थापक (पापा संस्था)

