आगरा। नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने ताजगंज श्मशान घाट को ताजमहल पर वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत माना है।
नीरी का कहना है कि ताजमहल की पश्चिमी दिशा में लगभग 350 मीटर के एरियल डिस्टेंस पर स्थित श्मशान घाट से सबसे अधिक वायु प्रदूषण हो रहा है। नीरी द्वारा किए जा रहे अध्ययन की सुप्रीम कोर्ट में जमा की गई प्रगति रिपोर्ट से यह स्थिति सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर को ताजमहल की चारदीवारी से 500 मीटर की परिधि में हो रही व्यावसायिक गतिविधियों के स्मारक पर प्रभाव का अध्ययन नीरी से कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने इन गतिविधियों को बंद करने या शिफ्ट करने के लिए नीरी से सुझाव भी देने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर नीरी की सात सदस्यीय टीम ने प्रमुख विज्ञानी डा. एसके गोयल के निर्देशन में तीन से सात जनवरी तक ताजमहल की 500 मीटर की परिधि में हो रही गतिविधियों का प्रभाव जानने को अध्ययन किया था। टीम ने स्थानीय हितधारकों, व्यापारियों, सरकारी अधिकारियों के साथ मंथन किया था।
सुप्रीम कोर्ट में 16 जनवरी को अध्ययन की प्रगति रिपोर्ट जमा करते हुए नीरी ने विस्तृत अध्ययन को तीन माह का समय मांगा था। प्रगति रिपोर्ट में नीरी ने ताजमहल की पश्चिमी दिशा में स्थित श्मशान घाट को ताजमहल की 500 मीटर की परिधि में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत माना है। नीरी ने अपनी रिपोर्ट में श्मशान घाट में प्रतिदिन 15 से 20 शवों का अंतिम संस्कार होने और एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार में 300 से 350 किग्रा लकड़ी व अन्य ज्वलनशील वस्तुओं का प्रयाेग होने की बात कही है।
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