आगरा: ताजनगरी में यमुना संरक्षण की अलख जगाने वाले ‘रिवर कनेक्ट कैंपेन’ ने शनिवार को अपनी यात्रा के 13 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर यमुना आरती स्थल, विश्व शांति की कामना और पर्यावरण चेतना की अनूठी ऊर्जा से सराबोर नजर आया। दीपों की झिलमिलाती लौ, वैदिक मंत्रोच्चार और यमुना मैया के जयकारों के बीच आयोजित इस ‘सालाना जलसे’ ने श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ-साथ प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी अहसास कराया।
युद्ध समाप्ति और वैश्विक शांति के लिए ‘महा-हवन’
कार्यक्रम की शुरुआत माँ यमुना की विधिवत पूजा-अर्चना और भव्य आरती के साथ हुई। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध की विभीषिका को देखते हुए, आरती स्थल पर एक विशेष विश्व शांति हवन का आयोजन किया गया। पंडित राहुल राज के संचालन में हुए इस हवन में उपस्थित सभी सदस्यों और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से युद्ध समाप्ति और प्रकृति के संतुलन के लिए आहुतियां दीं।
2014 से जारी है यमुना की ‘पीड़ा’ से जोड़ने का सफर
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पंडित जुगल किशोर ने अभियान की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया:
”वर्ष 2014 में जिस उद्देश्य के साथ रिवर कनेक्ट कैंपेन शुरू हुआ था, आज वह एक बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है। प्रतिदिन होने वाली आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यमुना की दुर्दशा और उसकी शुद्धि के लिए लोगों को जगाने का माध्यम है।”
नदियों के लिए राष्ट्रीय नीति की हुंकार
प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने इस मंच से सरकार से बड़ी मांग की। उन्होंने कहा कि नदियां हमारी संस्कृति और अस्तित्व का आधार हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए एक सशक्त राष्ट्रीय नीति बनाना समय की मांग है। वहीं, अभियान के प्रणेता बृज खंडेलवाल ने कहा कि आज की अशांत दुनिया में ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का काम करते हैं।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
विशेष यमुना आरती गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय द्वारा संपन्न कराई गई। कार्यक्रम की सुव्यवस्थित कमान चतुरभुज तिवारी और दीपक राजपूत ने संभाली। इस अवसर पर विशाल झा, दिनेश शर्मा, पद्मिनी अय्यर, ज्योति, सतीश गुप्ता, डॉ. मुकुल पांड्या, डॉ. अचल पंड्या, शशिकांत उपाध्याय, राकेश गुप्ता और जगन प्रसाद तेहरिया सहित भारी संख्या में पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।

