आगरा। जनपद के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) मनीष बंसल ने आपराधिक मुकदमों की जानकारी जानबूझकर छिपाकर शस्त्र (असलहा) लाइसेंस हासिल करने के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आईआईएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज के निदेशक अभिप्राय शर्मा के दोनों शस्त्र लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई न्यू आगरा थाने की विस्तृत आख्या और पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की संस्तुति के आधार पर अमल में लाई गई है।
प्रशासनिक अभिलेखों के मुताबिक, गणेश नगर, लॉयर्स कॉलोनी निवासी अभिप्राय शर्मा के नाम पर एक माउजर रिवाल्वर और एक राइफल का लाइसेंस स्वीकृत था। आरोपी अभिप्राय शर्मा के विरुद्ध थाना न्यू आगरा में हत्या के प्रयास, मारपीट, 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट (CLA) एक्ट और आर्म्स एक्ट सहित कई संगीन धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
झूठा शपथपत्र देकर छिपाए थे मुकदमे
जांच-पड़ताल के दौरान जिला प्रशासन के संज्ञान में एक बेहद गंभीर तथ्य यह आया कि जब आरोपी द्वारा पिस्टल के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया था, तब उसने अपने ऊपर पूर्व से दर्ज आपराधिक मुकदमों के इतिहास को पूरी तरह से छिपा लिया था। उसने आवेदन पत्र के साथ एक हलफनामा (शपथपत्र) प्रस्तुत किया था, जिसमें उसने यह झूठा दावा किया था कि उसके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है। इसके अतिरिक्त, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में भी इस बात की पूरी पुष्टि हो चुकी थी कि उसकी लाइसेंसी माउजर पिस्टल से पूर्व में फायरिंग (गोलीबारी) की गई थी। इसके साथ ही, उस पर असलहे का उपयोग अपनी सुरक्षा के बजाय दूसरों को मुहैया कराने के गंभीर आरोप भी सिद्ध पाए गए थे।
आयुध अधिनियम के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन
जिला मजिस्ट्रेट ने इन सभी गंभीर पहलुओं, पुलिस विभाग की आख्या और भारतीय आयुध अधिनियम (Arms Act) की धारा 17(3)(C) व 17(3)(D) के प्रावधानों के स्पष्ट उल्लंघन का गहराई से विधिक विश्लेषण करने के बाद यह सख्त निर्णय लिया है। प्रशासन के इस कड़े कदम से आपराधिक पृष्ठभूमि और गलत तथ्यों के आधार पर असलहा लाइसेंस लेने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है।

