आगरा। राधास्वामी मत के आदि केंद्र हजूरी भवन, पीपलमंडी में मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। राधास्वामी मत के पांचवें गुरु और पूर्व आचार्य प्रो. अगम प्रसाद माथुर (दादाजी महाराज) की तृतीय पुण्यतिथि पर आयोजित सत्संग में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
दिव्य रूप से सजी समाधि, गूंजे जयकारे
दादाजी महाराज की समाधि को विशेष पुष्पों और दिव्य रोशनी से सजाया गया था। तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मत्था टेकने के लिए लगी रहीं। पूरा परिसर “राधास्वामी” के जयकारों और मधुर भजनों की स्वर-लहरियों से गुंजायमान रहा। सत्संग के बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें लाखों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इतिहास और शिक्षा जगत के शिखर पुरुष थे दादाजी महाराज
दादाजी महाराज केवल एक धर्मगुरु ही नहीं, बल्कि एक प्रखर इतिहासवेत्ता, शिक्षाविद और साहित्यकार भी थे। उनके द्वारा लिखित पुस्तकें आज भी शोध कार्यों के लिए आधार मानी जाती हैं। उन्होंने दो बार (1982-85 और 1988-91) आगरा विश्वविद्यालय (अब डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय) के कुलपति के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक
वर्ष 1980 में उनके मार्गदर्शन में आगरा किला और फतेहपुर सीकरी में आयोजित ‘यादगार-ए-सुलह कुल’ आज भी एक बेमिसाल ऐतिहासिक आयोजन के रूप में याद किया जाता है। हजूरी भवन में हजूर महाराज, लालाजी महाराज, कुंवरजी महाराज और अब दादाजी महाराज की समाधियां भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं।

