लखनऊ/गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने गृह जनपद गोरखपुर को विकास की बड़ी सौगात दी। उन्होंने कुल 1055 करोड़ रुपये की लागत वाली 497 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस विकास उत्सव में सबसे खास रहा राप्ती नदी के तट पर ‘लिगेसी वेस्ट’ (पुराने कचरे) से निर्मित भव्य ईको पार्क और नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क। मुख्यमंत्री ने ईको पार्क का भ्रमण करते हुए कचरे से बनाई गई अद्भुत कलाकृतियों का अवलोकन किया। इस दौरान वेस्ट मटेरियल से बने एक शेर की प्रतिमा के साथ मुख्यमंत्री की फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गई।
अखिलेश यादव का पलटवार: “शेर देखना है तो इटावा सफारी आएं”
मुख्यमंत्री की इस फोटो पर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा, “नकली शेर के साथ मुस्कान, असली देखें तो हो जाए धड़ाम।” उन्होंने शेर की बनावट पर सवाल उठाते हुए इसे ‘कोरोना काल का शेर’ करार दिया और तंज कसा कि इसके बाल इतने लंबे क्यों हैं। अखिलेश ने सलाह देते हुए कहा कि यदि भाजपा को शेर ही बनवाना था तो कायदे का बनाते, इसके लिए उन्हें सपा सरकार में बनी इटावा की लायन सफारी का दौरा कर लेना चाहिए था।
मंच से मुख्यमंत्री की चुटकी: रवि किशन के ‘पैर छूने’ वाले बयान पर हंसी
विकास कार्यों के संबोधन के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के सांसद रवि किशन के एक पुराने बयान पर चुटीले अंदाज में मजे लिए। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए जनता से पूछा, “आपने सांसद जी का भाषण तो सुना होगा, लेकिन क्या उनके बताए आचरण को आप लोग अपना रहे हैं?” दरअसल, रवि किशन ने संसद में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान कहा था कि उनकी पत्नी उन्हें भारी वोट दिलाने में मदद करती हैं, इसलिए वे सम्मान में उनके पैर छूते हैं। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।
कचरे में हीरा और फिल्म शूटिंग की उम्मीद
सांसद रवि किशन ने मुख्यमंत्री के विजन की तारीफ करते हुए कहा कि महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) “कचरे में भी हीरा खोज लेते हैं।” उन्होंने कहा कि एकला बांध, जो कभी गंदगी का पर्याय था, अब एक शानदार ईको पार्क बन चुका है। यह न केवल पर्यटन और रोजगार का केंद्र बनेगा, बल्कि फिल्म निर्माताओं के लिए शूटिंग का एक नया डेस्टिनेशन भी साबित होगा। इस अवसर पर मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों ने गोरखपुर के बदलते स्वरूप को ‘नए उत्तर प्रदेश’ की पहचान बताया।

