आगरा में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि: ‘हृदयंगम्-102’ के तहत काव्य पाठ और राष्ट्रवादी विचारों का हुआ समागम

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आगरा: देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के बैनर तले जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 73वीं पुण्यतिथि पर एक विशेष कार्यक्रम “हृदयंगम्-102” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित ‘कंठोष्ठ्य-उत्सव’ में शहर के प्रबुद्ध साहित्यकारों, शिक्षाविदों और कवियों ने डॉ. मुखर्जी के जीवन दर्शन, उनकी विकसित भारत की परिकल्पना और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ वरिष्ठ उपन्यासकार डॉ. राजेन्द्र मिलन द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद शिक्षाविद् नीलिमा शर्मा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी की विचारधारा आज के युग में सनातन संस्कृति को मजबूती देने और रामराज्य की संकल्पना को साकार करने के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता को भारत के सुनहरे भविष्य की अनिवार्य शर्त बताया।

​सभा की अध्यक्षता करते हुए प्रभाकर शर्मा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का व्यक्तित्व राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक था। मुख्य वक्ता डॉ. ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’ ने डॉ. मुखर्जी की प्रेरणा से ब्रजभाषा और गंगा-जमुनी तहजीब के मेल पर प्रकाश डाला।

वहीं, विशिष्ट अतिथि साधना मेहरा ने जोर दिया कि डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों को हर भारतीय को अपने दैनिक जीवन में आत्मसात करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे।

​कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि डॉ. यशोयश ने किया, जबकि अतिथियों का स्वागत नरेन्द्र शर्मा द्वारा किया गया। अंत में संयोजिका आरती शर्मा ने सभी प्रतिभागियों और आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया।

​इस विशेष उत्सव में कवियों ने अपनी लेखनी के माध्यम से डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। काव्य पाठ करने वालों में डॉ. यशोयश, संजय कुमार, राजीव शर्मा ‘निस्पृह’, रामेन्द्र कुमार शर्मा, प्रभुदत्त उपाध्याय, आचार्य उमाशंकर, राकेश निर्मल, अशोक गोयल, नंदनंदन गर्ग, राम अवतार शर्मा, डॉ. राजीव शर्मा, अरुण कुमार शर्मा, दुष्यंत जी, उत्तम सिंह तथा इंदल इंदु प्रमुख थे।

सभी कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए ‘विकसित भारत’ के स्वप्न को स्वर देते हुए पूरे वातावरण को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया।