वाराणसी। बटुकों के यौन शोषण के आरोपों से घिरे ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अब विरोधियों पर पलटवार करते हुए एक बड़े षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। शंकराचार्य ने दावा किया है कि उन्हें बदनाम करने के लिए शाहजहांपुर के एक परिवार को मोहरा बनाने की कोशिश की गई। इस परिवार ने स्वयं मठ पहुंचकर शंकराचार्य को आपबीती सुनाई और एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर साजिशकर्ताओं के नामों का खुलासा किया।
प्रलोभन, साजिश और साहस की दास्तां
शंकराचार्य के अनुसार, शाहजहांपुर का यह परिवार जब वाराणसी पहुंचा, तो उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले बाइक सवार अज्ञात लोगों ने उन्हें रोककर ‘आशुतोष महाराज’ नामक व्यक्ति से फोन पर बात करवाई थी। आरोप है कि आशुतोष ने उस व्यक्ति को प्रलोभन दिया कि यदि वह शंकराचार्य पर अपनी छोटी बेटियों के यौन शोषण का झूठा मुकदमा दर्ज कराता है, तो उसकी बेटियों की शादी का पूरा खर्च और मोटी आर्थिक मदद दी जाएगी।
’सनातनी हूँ, पाप नहीं करूँगा’
पीड़ित व्यक्ति ने हिम्मत दिखाते हुए इस घिनौने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उसने कहा कि वह न तो शंकराचार्य से कभी मिला है और न ही एक सनातनी होने के नाते किसी धर्मगुरु पर ऐसा झूठा लांछन लगा सकता है। इनकार करने पर आरोप है कि आशुतोष महाराज ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने और ‘खुद को बचाकर रखने’ की सीधी धमकी दी।
गौ-रक्षा की आवाज दबाने की कोशिश?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पूरी साजिश को अपनी ‘गौ-प्रतिष्ठा आंदोलन’ से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें इसलिए फंसाया जा रहा है ताकि वे गौ-हत्या के खिलाफ आवाज उठाना बंद कर दें। उन्होंने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए मांग की है कि यदि किसी के पास यौन शोषण की कोई कथित सीडी या सबूत है, तो उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए, वरना ऐसी झूठी साजिशें रचना बंद करें।

