लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करवा चौथ के पावन पर्व पर एक तरफ जहां सुहागिनें अपने व्रत और पूजा-पाठ की तैयारियों में व्यस्त थीं, वहीं सरकारी अस्पतालों में तैनात नर्सों ने बेहद अनोखे और अनूठे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। राजकीय नर्सेस संघ के बैनर तले बलरामपुर अस्पताल की नर्सों ने हाथों में मेहंदी रचाकर और छलनी लेकर दो घंटे का सांकेतिक कार्य बहिष्कार किया। प्रदर्शनकारी नर्सों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों के संबंध में शासन की ओर से औपचारिक और लिखित शासनादेश जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन और तेज होता रहेगा।
9 अक्टूबर से जारी है दो घंटे का सांकेतिक विरोध
राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर बीते 9 अक्टूबर से ही प्रदेश के सभी जनपदों के सरकारी अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों में यह आंदोलन लगातार चल रहा है। नर्सिंग संवर्ग अपनी 13 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर रोज सुबह दो घंटे का कार्य बहिष्कार कर रहा है।
इसी कड़ी में करवा चौथ के खास दिन पर बलरामपुर अस्पताल की नर्सों ने हाथों में मेहंदी सजाकर अनोखे प्रदर्शन के जरिए प्रशासन का ध्यान खींचा। प्रदर्शन कर रही नर्सेस का कहना है कि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और अपर मुख्य सचिव अमित घोष के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता में मांगों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन जब तक लिखित आदेश हाथ में नहीं आ जाता, वे पीछे हटने वाली नहीं हैं।
शासनादेश में देरी हुई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आपसी सहमति के बावजूद शासनादेश जारी करने में अनावश्यक ही हीला-हवाली और देरी की गई, तो आंदोलन का दायरा और अधिक व्यापक कर दिया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर बहुत जल्द अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का बड़ा कदम उठाया जा सकता है, जिसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। नर्सों के इस आक्रामक रुख से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।
नर्सिंग संवर्ग की प्रमुख और 13 सूत्रीय मांगें
नर्सिंग स्टाफ की लंबे समय से चली आ रही इन प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
गृह जनपद में तैनाती: कर्मचारियों को उनके गृह जनपद में तैनाती देने और स्थानांतरण की एक पारदर्शी व निष्पक्ष व्यवस्था लागू की जाए।
पदोन्नति प्रक्रिया: निदेशालय से लेकर अस्पताल स्तर तक के सभी रिक्त पदों पर समयबद्ध तरीके से पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।
क्रेच (पालनाघर) की सुविधा: अस्पतालों में दिन-रात कार्य कर रहे चिकित्सा कर्मियों के छोटे बच्चों की देखरेख के लिए परिसर में पालनाघर की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सवेतन अवकाश: उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बी.एससी. नर्सिंग की तर्ज पर नर्सिंग संवर्ग को भी सवेतन अवकाश (Paid Leave) दिया जाए।
भत्ते और समायोजन: उच्चीकृत जिला चिकित्सालयों के मेडिकल कॉलेज में बदलने पर वहां कार्यरत नर्सिंग स्टाफ का उसी संस्थान में समायोजन हो और उच्च संस्थानों की तर्ज पर उचित भत्ते प्रदान किए जाएं।
अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि शासन स्तर से इन गंभीर और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर कितनी जल्दी सकारात्मक कदम उठाए जाते हैं और इस गतिरोध का क्या हल निकलता है।
