लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को ‘पुलिस स्मृति दिवस’ के अवसर पर प्रदेश के पुलिसकर्मियों को एक बड़ी सौगात दी है। लखनऊ स्थित पुलिस लाइंस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने फील्ड ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों, उपनिरीक्षकों और प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के अधिकारियों के विभिन्न भत्तों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की घोषणा की।
भत्तों में बढ़ोतरी का ब्योरा
मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित भत्तों में इजाफा किया गया है।
फील्ड ड्यूटी में तैनात सब इंस्पेक्टर (SI) और इंस्पेक्टर का मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल का मोबाइल भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह किया गया है। प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) अधिकारियों का यूनिफॉर्म भत्ता 6,400 रुपये से बढ़ाकर सीधा 15,000 रुपये कर दिया गया है।
”पहले नेताओं के पालतू जानवर ढूंढती थी पुलिस” – सीएम योगी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून-व्यवस्था के पुराने दौर की तुलना वर्तमान स्थिति से की। उन्होंने कहा, “एक दौर वह भी था जब अपराधी खुली जीप में बैठकर ऑटोमेटिक असलहे लहराते हुए बेखौफ घूमते थे। पुलिस अपराधियों पर हाथ डालने से डरती थी, क्योंकि कार्रवाई करने पर अपराधी के बजाय अधिकारी पर ही गाज गिर जाती थी। उस समय पुलिस का इस्तेमाल नेताओं के पालतू जानवरों को ढूंढने में किया जाता था।”
सीएम ने आगे कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और अपराधियों को भली-भांति पता है कि कानून तोड़ने पर उनका आखिरी ठिकाना कहाँ होगा।
विपक्ष और माफिया समर्थकों पर साधा निशाना
एनकाउंटर नीति पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं और माफिया की कब्रों पर जाकर छाती पीटते हैं, वे कभी शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के आंसू पोछने उनके घर नहीं जाते।
उन्होंने कहा कि जब पूरा देश त्योहारों पर अपने परिवारों के साथ खुशियाँ मना रहा होता है, तब हमारे पुलिसकर्मी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं। शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अमर शहीदों का कर्ज कभी नहीं चुकाया जा सकता, उनके नाम केवल स्मारकों तक सीमित नहीं हैं बल्कि राष्ट्र की चेतना पर अंकित हैं।
