उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर ठगी का एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। ताजनगरी के सदर बाजार थाना क्षेत्र में एक सैन्यकर्मी (आर्मी मैन) को मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर करीब 14 लाख रुपये हड़प लिए गए। इसके अलावा, उनके साथी से भी 6 लाख रुपये की ठगी किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने छह नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
निवेश के नाम पर दिया गया मोटा मुनाफा कमाने का झांसा
पुलिस को दी गई आधिकारिक शिकायत के मुताबिक, ठगों ने सैन्यकर्मी सचिन कुमार से संपर्क किया और खुद को निवेश व शेयर ट्रेडिंग के क्षेत्र में काम करने वाला विशेषज्ञ बताया। आरोपियों ने कम समय में भारी-भरकम रिटर्न (मुनाफा) दिलाने का भरोसा देकर उन्हें अपने जाल में फंसा लिया। आरोप है कि इसके लिए आरोपियों द्वारा विभिन्न फर्जी कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया जा रहा था।
आरोपियों के झांसे में आकर सैन्यकर्मी सचिन कुमार ने अलग-अलग माध्यमों और किस्तों में कुल 14 लाख रुपये निवेश के नाम पर ट्रांसफर कर दिए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने उनके परिचित और साथी यश गुप्ता को भी अपना शिकार बनाया और उनसे लगभग 6 लाख रुपये ठग लिए। इस प्रकार कुल मिलाकर 20 लाख रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली गई।
पैसे मांगने पर दी गई जान से मारने की धमकी
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने तय समय पर मुनाफा न मिलने और अपनी मूल रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने पहले टालमटोल करना शुरू कर दिया। जब पीड़ितों ने पैसों की वापसी के लिए लगातार दबाव बनाया, तो आरोपियों ने उनके साथ अभद्रता की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी भी दी।
पीड़ितों ने अंदेशा जताया है कि इस गैंग ने अलग-अलग लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है। हालांकि, इन सभी गंभीर दावों की असलियत पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगी।
पुलिस की कार्रवाई और तकनीकी जांच
घटना की शिकायत मिलने के तुरंत बाद सदर बाजार थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए छह नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों और पीड़ितों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों के विवरण, फर्जी कंपनियों के दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जिन कंपनियों के नाम पर पैसे लिए गए, वे वाकई अस्तित्व में थीं या सिर्फ लोगों को ठगने का एक मुखौटा थीं। साथ ही, गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश के लिए भी दबिश दी जा रही है।
