आगरा। कभी डॉक्टर बनकर मरीजों की जान बचाने का सपना देखने वाला एक युवक आज ट्रेनों में यात्रियों का सामान चुराने वाला शातिर अपराधी बन गया। कभी NEET परीक्षा क्वालीफाई करने वाले पुनीत ने वर्ष 2017 में परीक्षा रद्द होने के बाद मेडिकल की राह छोड़ दी और इसके बाद उसकी जिंदगी ने ऐसा खतरनाक मोड़ लिया कि वह अपराध की दुनिया में उतर गया। जीआरपी के अनुसार, पुनीत ने अपने दोस्त आकाश के साथ मिलकर ट्रेनों में चोरी का एक ऐसा संगठित नेटवर्क खड़ा किया था, जिसमें बुजुर्ग और अकेले सफर करने वाले यात्री मुख्य रूप से उनके निशाने पर रहते थे।
जीआरपी ने मंगलवार सुबह मुखबिर की सटीक सूचना पर दोनों आरोपियों को आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से धर दबोचा। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से ट्रेन यात्रियों के चुराए गए करीब 25 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुख्य आरोपी पुनीत के खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
गर्लफ्रेंड के कैंसर के इलाज के नाम पर शुरू किया अपराध
पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी पुनीत ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वह एक युवती से प्रेम करता था। उसकी गर्लफ्रेंड को कैंसर होने के कारण उसके इलाज में लगभग 80 लाख रुपये खर्च हो गए थे। पुनीत के मुताबिक, उसने इलाज के लिए अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी, जिसके चलते उस पर भारी आर्थिक दबाव और कर्ज बढ़ गया। इसी कर्ज को चुकाने और पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए उसने सबसे पहले चोरी का रास्ता चुना।
हालांकि, पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि चोरी से मिलने वाला काला धन सिर्फ कर्ज चुकाने में ही खर्च नहीं हो रहा था, बल्कि आरोपी महंगे कपड़े पहनने, शराब पीने, क्लब जाने और अपनी कथित लग्जरी लाइफस्टाइल को बरकरार रखने पर भी इस रकम को पानी की तरह बहा रहा था।
हफ्ते में दो दिन क्लब, बाकी दिन ट्रेनों में रेकी
पुलिस पूछताछ में यह बात भी उजागर हुई कि दोनों आरोपियों की जिंदगी दो हिस्सों में बंटी थी एक हिस्सा ट्रेनों में यात्रियों की रेकी करने में बीतता था और दूसरा हिस्सा चोरी के पैसों को ऐशो-आराम में उड़ाने में। पुनीत ने बताया कि वह और उसका साथी आकाश सप्ताह में करीब दो दिन बड़े क्लबों में जाते थे, जहां शराब और पार्टियों पर भारी रकम खर्च की जाती थी।
इनके निशाने पर हमेशा वे यात्री होते थे, जो रात के समय ट्रेन में गहरी नींद में सो जाते थे। दोनों कोच के भीतर यात्रियों की गतिविधि की रेकी करते और फिर किसी बुजुर्ग या अकेले सफर कर रहे यात्री को चुनते थे। जैसे ही यात्री सोता, वे मौका पाकर उसका बैग, पर्स या कीमती जेवरात लेकर अगले या किसी अन्य स्टेशन पर चुपचाप उतर जाते थे।
वारदात के बाद तुरंत बदल देते थे जिला
पुलिस के अनुसार, पकड़े जाने से बचने के लिए दोनों ने एक शातिर रणनीति अपना रखी थी। जिस जिले की पुलिस चोरी के किसी मामले में उन्हें पकड़कर चालान कर देती थी, वे उस जिले में दोबारा कभी वारदात नहीं करते थे। एक घटना को अंजाम देने के तुरंत बाद वे किसी दूसरे जिले का रुख कर लेते थे। इसी कार्यशैली के दम पर वे लंबे समय तक अलग-अलग इलाकों में घूमकर रेलवे यात्रियों को अपना शिकार बनाते रहे।
जीआरपी के सीओ राजेश दीक्षित ने बताया कि दोनों आरोपी बेहद संगठित तरीके से वारदातों को अंजाम देते थे। ट्रेन में चढ़ते ही वे यात्रियों के सामान और उनकी स्थिति पर पैनी नजर रखते थे। फिलहाल, जीआरपी ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और उनके आपराधिक इतिहास के साथ-साथ चोरी का माल खरीदने वाले सर्राफा कारोबारियों की भी तलाश शुरू कर दी है।
