लखनऊ/प्रयागराज: देश में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। महंगाई के इस दौर में अब मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए रसोई का बजट संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल यह है कि सरकार की गैस आपूर्ति की नीति और ऊंचे दामों से त्रस्त होकर प्रयागराज के एक परिवार ने खाली पड़े पुराने गैस सिलेंडरों को काटकर लकड़ी और कोयले से जलने वाले चूल्हों में बदल दिया है। इस ‘भारतीय जुगाड़’ का वीडियो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया है।
”आपदा में आविष्कार”: अखिलेश का कटाक्ष
वीडियो शेयर करते हुए अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए लिखा, “आपदा में आविष्कार! महंगी हुई गैस तो जिस सिलेंडर से चूल्हा जलता था, उसे ही चूल्हा बना लिया।” यह वीडियो उन परिवारों की सच्चाई बयां कर रहा है जो एक हजार रुपये के पार पहुंच चुकी गैस की कीमतों के आगे असहाय महसूस कर रहे हैं।
एक सिलेंडर में नहीं चल रहा गुजारा
प्रयागराज की साक्षी यादव बताती हैं कि उनका परिवार जॉइंट फैमिली है और एक सिलेंडर से महीने भर का काम नहीं चल पाता। उन्होंने कहा, “पहले जब गैस 450 रुपये की थी, तब भी महंगाई को लेकर हाय-तौबा मचती थी, आज दाम दोगुने हो गए हैं। दो सिलेंडर की जरूरत होती है लेकिन सरकार एक ही सिलेंडर दे रही है, ऊपर से गैस बुकिंग में 25 दिनों का अनिवार्य अंतराल और महंगाई ने घर का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।”
बच्चों का टिफिन तक हुआ प्रभावित
महंगाई के कारण केवल गैस ही नहीं, बल्कि राशन भी महंगा हो गया है। एक अन्य महिला ने व्यथा सुनाते हुए कहा, “घर में गैस खत्म हो गई थी और बुकिंग का समय पूरा नहीं हुआ था, जिसके चलते बच्चों को टिफिन में चिप्प्स और सेब देकर स्कूल भेजना पड़ा। भीषण गर्मी में पसीने से भीगकर चूल्हे पर खाना बनाना हमारी मजबूरी बन गई है।”
क्या है यह जुगाड़?
पुराने और खाली पड़े लोहे के गैस सिलेंडरों का मेटल बेहद मजबूत होता है। प्रयागराज के इस परिवार ने कबाड़ हो चुके इन्हीं सिलेंडरों को ऊपर से काटकर पोर्टेबल ‘वुड-स्टोव’ का रूप दिया है। यह न केवल आर्थिक तंगी का विकल्प बना है, बल्कि इसने एक बार फिर सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिलाओं का कहना है कि अब शौक तो दूर, दो वक्त की रोटी बनाना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।


