आगरा: कालिंदीपुरम कॉलोनी के पंचेश्वर महादेव मंदिर में सात दिनों से जारी श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का रविवार को भक्ति और भाव के संगम के साथ भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन कथा व्यास स्वामी रामप्रपन्नाचार्य (श्रीधाम वृंदावन) ने श्रीकृष्ण-सुदामा के अटूट प्रेम और मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। सुदामा चरित्र सुनते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और कई लोगों की आँखें नम हो गईं।
संस्कृति और भाषा पर दिया जोर
अपने संबोधन में स्वामी रामप्रपन्नाचार्य ने भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए एक महत्वपूर्ण विचार रखा। उन्होंने कहा, “हिंदी भाषा दिवस के साथ हमें संस्कृत भाषा दिवस को भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाना चाहिए। हिंदी हमारी लोकभाषा है, लेकिन हमारी मूल संस्कृति, वेद और पुराणों की आत्मा संस्कृत में ही निहित है। अपनी जड़ों से जुड़ाव के बिना संस्कृति का वृक्ष हरा-भरा नहीं रह सकता।” उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी मूल भाषाओं और संस्कारों को सहेजने का आह्वान किया।
सुदामा चरित्र: मित्रता और निष्काम भक्ति का संदेश
कथा व्यास ने कहा कि सुदामा की मित्रता समर्पण और सादगी का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण ने जिस तरह अपने निर्धन मित्र का सत्कार किया, वह सिखाता है कि ईश्वर के दरबार में धन नहीं, बल्कि भक्त का शुद्ध प्रेम और भाव मायने रखता है। उन्होंने जीवन में अहंकार त्याग कर विनम्रता को अपनाने का संदेश दिया।
भक्तिमय समापन और सामूहिक सहयोग
कथा के समापन पर प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन और पूर्णाहुति संपन्न हुई। मुख्य यजमान मनीष अग्रवाल ‘रावी’ ने भावुक होते हुए कहा कि सात दिनों तक कालिंदीपुरम की धरा पर भागवत रूपी अमृत वर्षा हुई, जिससे पूरा क्षेत्र वृंदावन की तरह पावन हो गया। उन्होंने सभी सहयोगियों और स्थानीय निवासियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पंकज अग्रवाल, नीलू अग्रवाल, विजय कुमार अग्रवाल, नीता अग्रवाल, एडवोकेट ललित गौतम, पार्षद निशांत सिंह ‘कन्नू’, धीरज सिंह, सुबोध सिंह और अर्जुन दास ने अहम भूमिका निभाई। संगीतमयी कथा को दिव्य बनाने में आचार्य ब्रह्मचारी, रामा, जीतू, रजनीश, शिवम और जग्गू सहित पूरी संगीत मंडली का विशेष योगदान रहा।


