​69 हजार शिक्षक भर्ती: लखनऊ में अभ्यर्थियों का दिल दहला देने वाला प्रदर्शन, भीषण गर्मी में पेट के बल रेंगते हुए पहुंचे बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और विवादित 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर न्याय की गुहार लगा रहे आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों का आंदोलन अब पूरी तरह से उग्र और तेज हो गया है। सोमवार को राजधानी लखनऊ की सड़कों पर एक बेहद भावुक और हैरान कर देने वाला नजारा देखने को मिला। बड़ी संख्या में एकत्रित हुए ओबीसी (OBC) और दलित वर्ग के पीड़ित अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास के बाहर एक अनोखा और दर्दनाक प्रदर्शन किया।

​राजधानी में पड़ रही भीषण और झुलसाने वाली गर्मी के बीच ये प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी सड़क पर पेट के बल रेंगते हुए (दंडवत करते हुए) मंत्री आवास की ओर आगे बढ़े। युवाओं की इस दयनीय और संघर्षपूर्ण स्थिति को देखकर वहां सड़क पर मौजूद आम राहगीर और स्थानीय लोग भी पूरी तरह से भावुक हो गए।

बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर पहुंचते ही उद्वेलित अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने तुरंत एक्शन लिया और प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाते हुए हिरासत में ले लिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों को बसों में भरकर धरना स्थल ‘इको गार्डन’ भेज दिया।

​19 मई की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले बनाया बड़ा दबाव

आंदोलन की राह पर उतरे अभ्यर्थियों का सीधा और गंभीर आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में लंबित चल रहे इस संवेदनशील मामले को कतई गंभीरता से नहीं ले रही है। उनका दर्द है कि पिछले कई वर्षों से इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में न्याय और रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं को शासन-प्रशासन के स्तर पर अब तक सिर्फ खोखले आश्वासन ही नसीब हुए हैं।

​इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में आगामी 19 मई को होने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई को देखते हुए अभ्यर्थियों ने सरकार पर चौतरफा दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में आंदोलनकारी युवाओं ने देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने पुरजोर मांग की है कि 19 मई को अदालत के पटल पर होने वाली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार अपनी ओर से ‘याची लाभ’ (Petitioner Benefit) का एक ठोस और लिखित प्रस्ताव रखे, ताकि इस लंबे कानूनी विवाद का हमेशा के लिए एक स्थायी समाधान निकाला जा सके।

​‘याची लाभ’ को बताया विवाद सुलझाने का सबसे सुरक्षित और सटीक रास्ता

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवाओं और छात्र नेताओं का तर्क है कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के भीतर आरक्षण पीड़ितों को ‘याची लाभ’ देने पर अपनी सैद्धांतिक सहमति जता देती है, तो यह इस पूरे गतिरोध को खत्म करने का सबसे सुरक्षित और व्यावहारिक रास्ता साबित होगा। अभ्यर्थियों के मुताबिक, इस फॉर्मूले को लागू करने से पूर्व में चयनित हो चुके किसी भी शिक्षक की वर्तमान नौकरी पर कोई विपरीत असर या खतरा नहीं पड़ेगा और दूसरी तरफ सालों से भटक रहे वास्तविक आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को भी समय पर न्याय मिल सकेगा।

फिलहाल, 19 मई की तारीख बेहद नजदीक होने के कारण अब देश की सर्वोच्च अदालत के रुख और इस पर राज्य सरकार के आने वाले आधिकारिक स्टैंड पर पूरे प्रदेश के युवाओं की नजरें टिकी हुई हैं।