यूपी में अब कर्फ्यू और दंगों के लिए कोई जगह नहीं…., मीडिया हाउस के कार्यक्रम में बोले योगी आदित्यनाथ, संवेदनशील और सकारात्मक रिपोर्टिंग की दी सलाह

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में एक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यवस्था, पत्रकारिता और औद्योगिक विकास पर बेहद बेबाक विचार साझा किए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि गलत और नकारात्मक रिपोर्टिंग हमेशा पूरे सिस्टम (व्यवस्था) को दुर्गति की ओर लेकर जाती है। ऐसी पत्रकारिता प्रगति की गति को पूरी तरह बाधित कर देती है। इसके विपरीत, सकारात्मक रिपोर्टिंग उसी व्यवस्था को प्रगति, प्रकृति और समृद्धि के नए सोपान की ओर अग्रसर करती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस सकारात्मक भाव के साथ आज से ठीक नौ साल पहले हमने उत्तर प्रदेश के अंदर कार्य करना शुरू किया था, उसी का परिणाम है कि आज यूपी की प्रगति आप सबके सामने, पूरे देश और दुनिया के सामने स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है।

​”एक सनसनीखेज खबर लगा सकती है आग, यूपी में कर्फ्यू की छूट किसी को नहीं”

​मीडिया की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि आज के दौर में एक भी सनसनी भरी खबर कहां आग लगा दे और क्या कुछ अनर्थ कर दे, इसका कोई भरोसा नहीं रहता। उन्होंने सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया, “हम इस बात के लिए कतई तैयार नहीं हैं कि उत्तर प्रदेश में फिर से पुराना दौर लौटे, फिर से कर्फ्यू लगे, दंगों की शुरुआत हो और किसी भी प्रकार की अराजकता फैलाने की छूट किसी को भी मिले।”

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में केवल संवेदनशील और जिम्मेदार रिपोर्टिंग ही मीडिया को समाज में विश्वसनीय और प्रासंगिक बनाए रखती है।

​पुराने उत्तर प्रदेश की बदहाली को किया याद: खजाना था खाली

​मुख्यमंत्री ने राज्य के ऐतिहासिक सुधारों की चर्चा करते हुए अतीत की बदहाली का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) पूरी तरह ध्वस्त था। पहले स्थिति यह थी कि देश के अंदर आप कहीं से भी आ रहे हों, जैसे ही उत्तर प्रदेश की सीमा शुरू होती थी, उसका अंदाजा अपने आप लग जाता था जहां सड़कों पर अचानक बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई देने लगें और चलना थोड़ा कठिन हो जाए, और यदि सायं काल (शाम) का समय है तो चारों तरफ अंधेरा प्रारंभ हो जाए, तो मानकर चलिए कि आप उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर आ चुके हैं।

​उन्होंने तत्कालीन वित्तीय संकट का खुलासा करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश का खजाना पूरी तरह खाली था और कोई भी बैंकर हमें पैसा या वित्तीय मदद देने के लिए तैयार नहीं था। कर्ज लेने की भी एक निर्धारित सीमा होती है, जिसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने तय कर रखा है, और पुराना उत्तर प्रदेश उस संकट के चरम पर था।

​ट्रेड यूनियन की नकारात्मक प्रवृत्ति ने कानपुर जैसे समृद्ध औद्योगिक शहर को किया बर्बाद

औद्योगिक पतन पर बोलते हुए सीएम योगी ने कानपुर का विशेष रूप से उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कानपुर कभी देश के अंदर सबसे समृद्ध औद्योगिक शहरों में से एक माना जाता था, जो हजारों-लाखों लोगों के रोजगार का मुख्य माध्यम बना हुआ था। लेकिन बाद के वर्षों में वहां के सारे उद्योग बंद हो गए। एक समय था जब वहां के श्रमिक और कामगार बड़े आत्मसम्मान के साथ सिर तानकर अपने घर से टिफिन लेकर निकलते थे, उद्योगों में दिनभर काम करते थे और शाम को उसी गौरव और गरिमा के साथ सकुशल वापस आते थे।

​परंतु, दुर्भाग्य से वहां के उद्योग बंद हो गए और जो व्यक्ति कभी गौरव के साथ काम पर जाता था, आज वह मामूली ठेला लगाने के लिए मजबूर हो गया है। मुख्यमंत्री ने इसका सीधा दोष मढ़ते हुए कहा कि केवल ‘ट्रेड यूनियन’ की नकारात्मक प्रवृत्ति ने ही वहां के फलता-फूलता उद्योगों को पूरी तरह से नष्ट और बर्बाद कर डाला। इस प्रवृत्ति के कारण उद्योगपति तो उत्तर प्रदेश से पलायन कर दूसरी जगह चले गए और वहां अपने नए उद्योग स्थापित कर लिए, लेकिन वहां काम करने वाला सीधा-साधा गरीब श्रमिक इस ट्रेड यूनियन की राजनीति का शिकार बनकर रह गया और अंततः भुखमरी की कगार पर पहुंच गया।

​”चंदा वसूली कर झोलाछाप नेता भरते हैं अपना घर, कामगारों को किया तबाह”

​ट्रेड यूनियन के नेताओं पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सब जमीनी स्तर पर देखते होंगे कि ये ट्रेड यूनियन के नेता खुद धरातल पर कोई रचनात्मक काम नहीं करते। ये लोग केवल एक झोला कंधे पर लटकाकर घूमते रहते हैं और हर एक उद्योग व व्यक्ति से डरा-धमकाकर या दबाव बनाकर चंदा वसूली करते हैं। इस अवैध वसूली से वे अपने घरों को तो धन-दौलत से पूरी तरह भर लेते हैं, लेकिन उस सीधे-साधे श्रमिक, कामगार और उस पूरे औद्योगिक सिस्टम से जुड़े लाखों लोगों को एक समय पर भुखमरी के कगार पर लाकर लावारिस छोड़ देते हैं।

​सीएम योगी ने अंत में बेहद कड़े शब्दों में निष्कर्ष देते हुए कहा कि ट्रेड यूनियन की यह प्रवृत्ति इतिहास में कभी भी सकारात्मक नहीं रही है। देश और दुनिया के इतिहास में जहां पर भी यह नकारात्मक प्रवृत्ति पनपी है, वहां उसने सिर्फ और सिर्फ विनाश और सत्यानाश ही किया है, इस प्रवृत्ति ने आज तक समाज के किसी भी वर्ग का कभी कोई कल्याण नहीं किया है।