आगरा का असगर अली हत्याकांड: फरार रवि यादव और कामरान वारसी पर जल्द घोषित होगा इनाम, वायरल ऑडियो और लोकेशन से खुला राज

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आगरा: ताजनगरी के बहुचर्चित ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड में आगरा पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अब फरार चल रहे मुख्य नामजद आरोपियों रवि यादव और कामरान वारसी पर जल्द ही कानूनी शिकंजा कसते हुए इनाम घोषित करने की तैयारी में है।

दोनों शातिरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की आधा दर्जन टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। कत्ल की इस गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाले तकनीकी साक्ष्य, एक वायरल ऑडियो और वारदात में इस्तेमाल की गई संदिग्ध कार लगी है।

​”कार में मैं खुद था…” — वायरल ऑडियो से मची खलबली

​इस पूरे हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पुलिस महकमे और आरोपियों के करीबियों में खलबली मचा दी है। इस कथित ऑडियो में फरार आरोपी रवि यादव खुद यह स्वीकार करता सुनाई दे रहा है कि वारदात के वक्त वह उसी कार के भीतर मौजूद था, जिससे घटना को अंजाम दिया गया।

डीसीपी सिटी (DCP City) सैयद अली अब्बास ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया “वायरल हुआ ऑडियो हमारी जांच के लिए एक बेहद टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। इस ऑडियो से जांच एजेंसियों को कई ऐसे गोपनीय सुराग मिले हैं, जो कत्ल की कड़ियों को आपस में जोड़ते हैं। पुलिस अब इस ऑडियो को पूरी तरह जब्त कर इसकी फोरेंसिक जांच करा रही है, ताकि आरोपी की आवाज का वैज्ञानिक मिलान (Voice Sampling) कराया जा सके।”

​शाहगंज के जंगल से संदिग्ध कार बरामद, कत्ल की गाड़ी के बदले मालिक

​तकनीकी सर्विलांस और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर आगरा पुलिस ने शाहगंज थाना क्षेत्र के पथौली जंगल से वारदात में प्रयुक्त संदिग्ध कार को लावारिस हालत में बरामद कर लिया है। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह कार पहले अरुण नामक व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड थी, जिसे बाद में प्रेम नारायण नामक शख्स को बेच दिया गया था। पुलिस अब इस कार के ट्रांसफर, इसके वास्तविक स्वामित्व और घटना के दिन इसके वास्तविक इस्तेमाल से जुड़े हर बारीक पहलू की कड़ाई से तफ्तीश कर रही है।

​डॉक्टर और भाई समेत जीएसटी ‘गैंग’ भी जांच के रडार पर

​जांच की आंच अब शहर के कुछ रसूखदार लोगों तक भी पहुंच गई है। मामले में डॉ. अजय कुमार यादव और उनके भाई अरुण की भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पुलिस ने उन्हें भी जांच के दायरे में ले लिया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ट्रांसपोर्टर की हत्या की इस गहरी साजिश में इनकी कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष संलिप्तता थी या नहीं।

इसके अलावा, पुलिस को कुछ स्थानीय होटल संचालकों से भी शिकायतें मिली हैं कि आरोपियों द्वारा उन पर अवैध दबाव और धमकियां दी जा रही थीं। सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह है कि इस हत्याकांड के तार वाणिज्य कर विभाग (GST ऑफिस) में सक्रिय एक कथित सिंडिकेट (गैंग) से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं, जिसकी कड़ाई से छानबीन जारी है।

सड़क हादसा दिखाकर दबाना चाहते थे मामला

​गौरतलब है कि बीते 4 अप्रैल को ट्रांसपोर्टर असगर अली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआत में शातिर शाजिशकर्ताओं ने इसे एक सामान्य ‘सड़क हादसा’ (Hit and Run) साबित करने की पूरी कोशिश की थी और पुलिस भी इसे एक्सीडेंट मान रही थी। लेकिन, मृतक के परिजनों के अंदेशे और बाद में सामने आए वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्यों (लोकेशन डेटा और कॉल डिटेल्स) के आधार पर पुलिस ने पाया कि घटना के समय रवि यादव की लोकेशन ठीक घटनास्थल के पास ही थी। इसके बाद पुलिस ने मुकदमे में हत्या (IPC/BNS की धारा 302) की गंभीर धाराएं बढ़ाईं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही फरार आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाएगा।