नवाचारी शिक्षक गौरव पाठक: शिक्षा, सेवा और समाज सुधार का प्रेरणादायक नाम

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आज के समय में जब शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम बनती जा रही है, वहीं कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन मानते हैं। उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद के प्रतिष्ठित शिक्षक गौरव पाठक ऐसे ही प्रेरणादायक शिक्षकों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने जीवन को विद्यार्थियों, समाज और मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। वे न केवल एक शिक्षक हैं, बल्कि समाज सुधारक, मार्गदर्शक और युवाओं के प्रेरणास्रोत के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं।

हाथरस जनपद के मेंडू कस्बे के मोहल्ला सारस्वतान निवासी गौरव पाठक वर्तमान में श्री नेहरू स्मारक भगवानदास इंटर कॉलेज मेंडू में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने एमएससी रसायन विज्ञान के साथ-साथ गणित और अर्थशास्त्र में एमए की शिक्षा प्राप्त की है। उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने समाज और विद्यार्थियों की सेवा को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया।

गौरव पाठक बताते हैं कि उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा अपने पिता स्वर्गीय सत्य प्रकाश पाठक गुरुजी से मिली। उनके पिता हमेशा समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते थे। उसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए गौरव पाठक आज शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, रोजगार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहे हैं।

उनका मानना है कि सेवा कार्य करने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि सच्ची भावना की आवश्यकता होती है। वे कहते हैं कि सभी दानों में विद्या दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है, इसलिए उनका अधिकतर प्रयास शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने पर केंद्रित रहता है।

गौरव पाठक का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान बेहद उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने अपने विद्यार्थियों को इतना सक्षम बनाया कि उनके पढ़ाए हुए 450 से अधिक छात्र-छात्राएं आज विभिन्न सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। यह किसी भी शिक्षक के लिए गर्व की बात है कि उसके विद्यार्थी समाज में सफलता प्राप्त कर देश सेवा कर रहे हों।

कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश संकट से जूझ रहा था, तब गौरव पाठक ने समाज सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने मेंडू क्षेत्र में 108 वैक्सीनेशन कैंपों का आयोजन कराया, जिनके माध्यम से 21 हजार से अधिक लोगों को वैक्सीन की डोज लगाई गई। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय और अलीगढ़ के डॉक्टरों की टीम बनाकर लोगों को निःशुल्क ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया। जरूरतमंद मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था भी कराई गई।

शिक्षा के क्षेत्र में उनका एक और महत्वपूर्ण योगदान बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। पिछले दस वर्षों से यह सेवा लगातार जारी है, जिसका लाभ अब तक 1500 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुका है। खास बात यह है कि उन्होंने छात्राओं के लिए भी अलग से निःशुल्क परिवहन सुविधा शुरू की, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को सुरक्षित माहौल में परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में मदद मिली।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी गौरव पाठक लगातार कार्य कर रहे हैं। अभ्यास फाउंडेशन के माध्यम से वे छात्रों को आईआईटी, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की ऑनलाइन निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध करा रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए यह पहल बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

गौरव पाठक पिछले दस वर्षों से हर साल 100 से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों को किताबें, स्टेशनरी और स्कूल ड्रेस वितरित करते आ रहे हैं। वहीं पर्यावरण संरक्षण के लिए वे पिछले पंद्रह वर्षों से पौधारोपण अभियान और पौधों के वितरण का कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्रों के तनाव को कम करने के लिए “हेल्पडेस्क सत्य चेतना” की स्थापना की, जो पिछले सात वर्षों से लगातार विद्यार्थियों को मानसिक सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान कर रही है। इस अभिनव पहल के लिए उन्हें विजनरी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान सराहनीय है। माध्यमिक शिक्षा विभाग में मास्टर ट्रेनर के रूप में उन्होंने सड़क सुरक्षा फोर्स का गठन किया और हेलमेट वितरण अभियान चलाया। विद्यार्थियों और आम नागरिकों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाकर उन्होंने जागरूकता फैलाने का कार्य किया।

इसके अलावा वे रक्तदान शिविरों के आयोजन में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। समाज में रक्त की कमी को दूर करने के लिए वे अब तक स्वयं 50 बार रक्तदान कर चुके हैं। यह उनकी मानव सेवा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गौरव पाठक शिक्षा को तकनीक से जोड़ने में भी विश्वास रखते हैं। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ऑडियो और वीडियो लेक्चर उपलब्ध कराते हैं, ताकि दूरदराज के छात्र भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।

उनकी सबसे प्रेरणादायक पहलों में से एक “विद्यालय आपके द्वार” अभियान है, जिसे वे पिछले पंद्रह वर्षों से चला रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे उन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास करते हैं जो किसी कारणवश विद्यालय नहीं आ पाते। हाल ही में इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें डॉक्टर आंबेडकर आदर्श सम्मान से सम्मानित किया गया।

गौरव पाठक का जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक शिक्षक केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज को दिशा देने वाला सच्चा मार्गदर्शक भी होता है। शिक्षा, सेवा और समाज सुधार के क्षेत्र में उनका योगदान आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। ऐसे नवाचारी और समर्पित शिक्षक वास्तव में समाज की अमूल्य धरोहर हैं।