रास्ता होता तो हमारे बच्चे भी बोलते फादर-मदर…उटंगन नदी पर पुल के लिए महिलाओं ने शुरू किया बेमियादी धरना

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पिनाहट (आगरा): क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि 2026 में भी भारत का कोई ऐसा गांव होगा जहाँ लोग चारपाई और ट्यूब के सहारे नदी पार करते हों? आगरा की ग्राम पंचायत अरनोटा का गांव सुखलालपुरा आज भी बदहाली के इसी दौर में जी रहा है। गुरुवार को इस गांव का दर्द उस समय ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा, जब घूंघट की ओट में धरना दे रही महिलाओं ने प्रशासन की संवेदनहीनता पर करारा प्रहार किया। बिलखती महिलाओं ने कहा “अगर हमारे गांव में रास्ता होता, तो हमारे बच्चे भी पढ़-लिखकर ‘फादर-मदर’ बोलना सीखते।”

सिस्टम के खिलाफ अनिश्चितकालीन महासंग्राम

भारतीय किसान यूनियन (जय हिंद) के नेतृत्व में उटंगन नदी के किनारे ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। करीब एक हजार की आबादी वाला यह गांव जंगल के बीचों-बीच कैद होकर रह गया है। ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है— उटंगन नदी पर पक्का पुल, गांव तक पहुँचने के लिए पक्का मार्ग और रेलवे अंडरपास।

​जान जोखिम में डालकर सफर की मजबूरी

ग्रामीणों ने बताया कि बाजार या अस्पताल पहुँचने के लिए उनके पास कोई सुरक्षित रास्ता नहीं है। बरसात के दिनों में उटंगन नदी का रौद्र रूप गांव को दुनिया से काट देता है। मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर चारपाई या ट्यूब के जरिए नदी पार करते हैं। नवविवाहिता सीमा और कमला देवी ने घूंघट में रहते हुए अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों के डर और रास्तों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई छूट रही है।

अब तक 7 जिंदगियां निगल चुकी है अव्यवस्था

गांव के संजीव कुमार ने बताया कि यह बदहाली सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा साबित हो रही है। पिछले एक साल में रक्षाबंधन पर नदी पार करते समय एक युवक की बहने से मौत हो गई, वहीं दो साल पहले एक महिला की रेलवे पटरी पार करते समय जान चली गई। ग्रामीणों का दावा है कि अब तक कुल 7 लोग इस प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं।

​रिश्तों पर भी पड़ा ‘बदहाली’ का साया

ग्रामीण महिला खिलौनिया देवी ने एक और कड़वा सच बयां किया। उन्होंने कहा कि गांव की भौगोलिक स्थिति और खतरनाक रास्तों के कारण लोग यहाँ अपनी बेटियों का रिश्ता करने से कतराते हैं। सामाजिक रूप से यह गांव अलग-थलग पड़ता जा रहा है।

चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

ग्राम प्रधान रामनिवास वर्मा और ग्रामीण अवधेश वर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक पुल और अंडरपास का निर्माण शुरू नहीं होता, धरना खत्म नहीं होगा। ग्रामीणों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आगामी चुनावों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

​धरना स्थल पर सुरक्षा के लिहाज से थाना बसई अरेला की पुलिस मौजूद रही। इस दौरान चंपाराम, रामहेत वर्मा, कालीचरण, प्रेम सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष अपनी मांगों को लेकर डटे रहे।

रिपोर्टर- नीरज परिहार