कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पारंपरिक और सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली भवानीपुर सीट का परिणाम सामने आया। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने एक बार फिर ‘जायंट किलर’ की भूमिका निभाते हुए टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से पराजित कर दिया। चुनावी नतीजों के इस चौंकाने वाले मोड़ ने बंगाल की सियासत को एक नई दिशा दे दी है।
नंदीग्राम का इतिहास भवानीपुर में दोहराया गया
ममता बनर्जी के लिए यह हार किसी गहरे जख्म से कम नहीं है, क्योंकि यह लगातार दूसरा मौका है जब उन्हें अपने ही पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी है। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की चर्चित जंग में भी सुवेंदु ने ममता बनर्जी को मात दी थी। कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार रहे सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और सिंगूर आंदोलनों में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद से वे दीदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।
सुवेंदु का दावा पड़ा भारी, ढह गया टीएमसी का किला
गौरतलब है कि 2021 में नंदीग्राम से हारने के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री की कुर्सी सुरक्षित की थी। इस बार सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव से पहले ही यह हुंकार भरी थी कि वे भवानीपुर से अपनी उम्मीदवारी जताएंगे और जीत हासिल करेंगे। 4 मई की शाम आते-आते सुवेंदु का यह दावा हकीकत में तब्दील हो गया और टीएमसी का अभेद्य किला माना जाने वाला भवानीपुर भगवा रंग में रंग गया।
भवानीपुर का सियासी सफरनामा
दक्षिण कोलकाता का यह क्षेत्र हमेशा से सत्ता का केंद्र रहा है। 1951 में वजूद में आने के बाद इस सीट पर लंबे समय तक कांग्रेस का वर्चस्व रहा और एक बार वामपंथियों ने भी यहां जीत का स्वाद चखा। परिसीमन के बाद 2011 से यह सीट तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी की निजी साख का पर्याय बन गई थी।
कालीघाट जैसे वीआईपी इलाके को समेटने वाली इस सीट पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान हुआ था। लेकिन 2026 के इन चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने इस बार परिवर्तन की एक नई पटकथा लिख दी है।

