आगरा: ताजनगरी की राजनीति में इस वक्त एक ‘सियासी भूकंप’ की आहट सुनाई दे रही है। वैसे तो आगरा की सभी 9 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है और इसे पार्टी का अभेद्य किला माना जाता है, लेकिन धरातल से आई एक ताज़ा रिपोर्ट ने सत्ताधारी दल के खेमे में खलबली मचा दी है। दैनिक भास्कर के सर्वे के अनुसार, जनता का असंतोष अब आंकड़ों में तब्दील हो चुका है, जहाँ 9 में से 8 विधायक कसौटी पर पूरी तरह फेल साबित हुए हैं।
सिर्फ एक ‘धुरंधर’ बचा पाया अपनी साख:
इस सियासी अंधेरे के बीच केवल एत्मादपुर के विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ही अपनी लोकप्रियता बचाने में सफल रहे हैं। सर्वे के अनुसार, वह जिले के इकलौते विधायक हैं जिन्हें 51% जनता ने ‘पासिंग मार्क्स’ देते हुए दोबारा अपनी पसंद बताया है। बाकी 8 विधायकों के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
दिग्गजों के नाम भी पड़े फीके:
हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य (59% असंतोष) और योगेंद्र उपाध्याय (63% असंतोष) जैसे दिग्गज नाम भी शामिल हैं, जिन्हें जनता ने सिरे से नकार दिया है। सबसे खराब स्थिति फतेहाबाद की है, जहाँ छोटेलाल वर्मा के खिलाफ 90% लोगों ने नाराजगी जाहिर की है। ‘दलबदलू’ की छवि उन पर इस कदर भारी पड़ रही है कि जनता उन्हें दोबारा मौका देने के मूड में बिलकुल नहीं है।
असंतोष का ‘स्कोरकार्ड’:
जनता की नाराजगी की सूची में छोटेलाल वर्मा के बाद डॉ. जीएस धर्मेश (84%) और खेरागढ़ के भगवान सिंह कुशवाह (81%) का नाम सबसे ऊपर है। अन्य विधायकों की स्थिति भी चिंताजनक है:
चौधरी बाबूलाल: 72% असंतोष
पक्षालिका सिंह: 63% असंतोष
पुरुषोत्तम खंडेलवाल: 54% असंतोष
भाजपा के लिए ‘वेक-अप कॉल’:
आगरा से आई यह रिपोर्ट भाजपा नेतृत्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है। आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि अब केवल ‘चेहरे’ चमकाने से चुनावी वैतरणी पार नहीं होगी, बल्कि जनता को धरातल पर काम चाहिए। यदि पार्टी ने समय रहते इन 8 चेहरों पर कैंची नहीं चलाई और टिकट वितरण में बड़ा बदलाव नहीं किया, तो ताजनगरी में सत्ता की बाजी पलट सकती है। आगरा का यह जनाक्रोश आने वाले चुनावों में पूरे प्रदेश की सियासत को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

