नोएडा बॉर्डर पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: लखनऊ में ‘नजरबंदी’ से बचकर निकले माता प्रसाद पांडेय को पुलिस ने सीमा पर रोका

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नोएडा (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश की सियासत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को भारी पुलिस बल ने नोएडा बॉर्डर पर रोक लिया। माता प्रसाद पांडेय समाजवादी पार्टी के उस 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय डेलीगेशन का नेतृत्व कर रहे थे, जिसे पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सैलरी विवाद के बाद हुए बवाल की हकीकत जानने के लिए नोएडा भेजा था।

​नजरबंदी से बचकर निकले, बॉर्डर पर घिरे घटनाक्रम की शुरुआत लखनऊ से हुई, जहाँ प्रशासन ने उन्हें वृंदावन योजना स्थित उनके आवास पर ही ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) करने की कोशिश की थी। उनके घर के बाहर सुबह से ही पीएसी और पुलिस का कड़ा पहरा था, लेकिन वरिष्ठ नेता पुलिस को चकमा देकर वहां से निकलने में कामयाब रहे। हालांकि, जैसे ही उनका काफिला नोएडा की सीमा पर पहुँचा, पुलिस की घेराबंदी ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

​”विपक्ष की आवाज दबा रही है सरकार”

पुलिसिया कार्रवाई से नाराज माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जब भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ डरते हैं, तो पुलिस को ढाल की तरह आगे कर देते हैं। यह लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जेल जाने या नजरबंद होने से डरने वाले नहीं हैं और मजदूरों व जनता के हक की आवाज उठाते रहेंगे।

​सपा का 10 सदस्यीय मिशन सपा के इस डेलीगेशन में माता प्रसाद पांडेय के साथ पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर, अतुल प्रधान, पंकज कुमार मलिक, राजकुमार भाटी और सुधीर भाटी जैसे दिग्गज नेता शामिल थे। पार्टी का उद्देश्य उन मजदूरों से मिलना था जो अपनी सैलरी की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

​हिंसा के पीछे ‘विदेशी साजिश’ का दावा

एक तरफ जहाँ विपक्ष इसे मजदूरों का जायज गुस्सा बता रहा है, वहीं नोएडा पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, 13 अप्रैल को हुए बवाल को हवा देने में पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल्स की भूमिका संदिग्ध है।

जांच में सामने आया है कि कुछ फर्जी अकाउंट्स के जरिए हिंसा और मौतों की झूठी खबरें फैलाकर माहौल बिगाड़ा गया। फिलहाल, नोएडा का इंडस्ट्रियल बेल्ट छावनी में तब्दील है और प्रशासन व विपक्ष के बीच तनातनी चरम पर है।