कानपुर: कानपुर के बाजारों में 100 से 200 रुपये में मिलने वाले स्टाइलिश और ब्रांडेड की नकल वाले चश्मे शहरवासियों के लिए एक साइलेंट किलर साबित हो रहे हैं। किदवई नगर, मोतीझील, घंटाघर, रावतपुर और कल्याणपुर जैसे व्यस्त इलाकों में फुटपाथ पर बिकने वाले ये चश्मे दिखने में जितने आकर्षक हैं, आंखों के लिए उतने ही घातक। एलएलआर अस्पताल (हैलट) के विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि बिना जांचे-परखे खरीदे गए ये चश्मे आपको अंधेपन की दहलीज तक ले जा सकते हैं।
मोतियाबिंद और रेटिना डैमेज का बढ़ता खतरा
हैलट अस्पताल की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन के अनुसार, इन सस्ते चश्मों में इस्तेमाल होने वाले लेंस की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं होती। इनमें अक्सर ‘विजुअल डिस्टॉर्शन’ (दृष्टि भ्रम) और गलत नंबर होते हैं। खराब लेंस की वजह से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे न केवल सिरदर्द और भारीपन की समस्या होती है, बल्कि लंबे समय में यह मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन जाता है।
UV प्रोटेक्शन का भ्रम और कड़वा सच
अक्सर लोग यह समझते हैं कि गहरे काले रंग का चश्मा धूप से पूरी सुरक्षा देगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है। डॉ. शालिनी ने बताया कि अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों से सुरक्षा लेंस के रंग से नहीं, बल्कि उसमें मौजूद स्पेशल फिल्टर से मिलती है। जब हम बिना UV फिल्टर वाला काला चश्मा पहनते हैं, तो अंधेरे के कारण हमारी पुतलियां फैल जाती हैं। ऐसे में हानिकारक किरणें और भी अधिक मात्रा में सीधे रेटिना तक पहुँचती हैं, जिससे आंखों को फायदे की जगह दोगुना नुकसान होता है।
मामूली नंबर, बड़ी मुश्किल
हाल ही में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया जब एक युवा मरीज लगातार सिरदर्द और सन एलर्जी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुँचा। जांच में पता चला कि वह जो सस्ता चश्मा पहन रहा था, उसमें अनजाने में 0.5 का सिलेंडर नंबर मौजूद था। मरीज को इसका अंदाजा तक नहीं था, लेकिन इस छोटे से नंबर ने उसकी आंखों की नसों पर भारी दबाव डाल दिया था।
फैशन नहीं, सेहत का रखें ख्याल
विशेषज्ञों का कहना है कि चश्मा सिर्फ एक एक्सेसरी नहीं, बल्कि एक मेडिकल उपकरण है। इसे खरीदने से पहले किसी अनुभवी ऑप्टिशियन या डॉक्टर से सलाह लेना अनिवार्य है। डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि फुटपाथ पर मिलने वाले ‘ब्रांडेड’ दिखने वाले चश्मों के लालच में न आएं।
बचाव के लिए क्या करें?
चश्मा हमेशा प्रमाणित और भरोसेमंद दुकानों से ही खरीदें।
खरीदने के बाद लेंस की गुणवत्ता और UV प्रोटेक्शन की जांच कराएं।
यदि चश्मा पहनने के बाद सिर में दर्द या आंखों में खिंचाव महसूस हो, तो उसे तुरंत हटा दें।

