आगरा में मथुरा जैसे बड़े हादसे का इंतज़ार? पालीवाल पार्क बाल बिहार की झील में बिना ‘लाइफ जैकेट’ हो रही बोटिंग

स्थानीय समाचार

आगरा: ताजनगरी में सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और ठेकेदारों की मनमानी किसी बड़ी त्रासदी को न्योता दे रही है। मथुरा में यमुना नदी के भीतर हुए हालिया दर्दनाक नाव हादसे, जिसमें एक दर्जन से अधिक जिंदगियां काल के गाल में समा गई थीं, उसके बावजूद आगरा का प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। ताजा मामला शहर के प्रमुख पालीवाल पार्क के ‘बाल बिहार’ हरि पर्वत क्षेत्र का है, जहां पर्यटकों की सुरक्षा को ताक पर रखकर मौत का खेल खेला जा रहा है।

​न लाइफ जैकेट, न कोई सुरक्षा घेरा:

हैरानी की बात यह है कि बाल बिहार पार्क स्थित झील, जिसकी गहराई कई फीट बताई जा रही है, वहां बोटिंग के दौरान सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पर्यटकों को बिना ‘लाइफ सेफ्टी जैकेट’ के ही गहरे पानी में बोटिंग कराई जा रही है। नियमों के मुताबिक, बोटिंग शुरू करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा जैकेट पहनाना अनिवार्य है, लेकिन यहां ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुका है।

​उद्यान विभाग की चुप्पी पर सवाल:

जानकारी के अनुसार, उद्यान विभाग ने इस पार्क का टेंडर तो जारी कर दिया, लेकिन ठेकेदार द्वारा किए जा रहे सुरक्षा उल्लंघन पर कोई लगाम नहीं लगाई। विभाग की यह उदासीनता सीधे तौर पर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मथुरा हादसे के बाद प्रशासन को सुरक्षा ऑडिट करना चाहिए था, लेकिन यहां तो पुराने हादसों से कोई सबक ही नहीं लिया जा रहा है।

​क्या किसी बड़ी त्रासदी का है इंतज़ार?

पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान इस पार्क में भारी भीड़ उमड़ती है, जिनमें बच्चों की संख्या काफी अधिक होती है। ऐसे में बिना जैकेट के बोटिंग कराना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या आगरा का जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते इन सुरक्षा मानकों को अनिवार्य नहीं किया गया और लापरवाह ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आगरा को एक बार फिर किसी दुखद घटना का गवाह बनना पड़ सकता है।