Agra News: थाने के मालखाने से लाखों की नकदी और मोबाइल हुए गायब, कोर्ट ने दिए FIR के आदेश

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आगरा। ताजनगरी की पुलिस व्यवस्था उस समय शर्मसार हो गई जब थाना मंटोला के मालखाने से जुआ अधिनियम के तहत जब्त की गई नकदी और कीमती सामान रहस्यमयी तरीके से गायब पाया गया। अदालत की सख्ती के बाद हुए इस खुलासे ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

मामला तब उजागर हुआ जब अदालत ने जुआ अधिनियम से जुड़े मामलों में जब्त माल का रिकॉर्ड तलब किया और जांच में पाया गया कि 1 लाख 40 हजार 730 रुपये नकद, सात मोबाइल फोन और ताश के पत्ते तक रिकॉर्ड से गायब हैं।

इस गंभीर लापरवाही या कथित गबन पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

जुआ अधिनियम के मामलों का मालखाना रिकॉर्ड बना शक के घेरे में

जानकारी के अनुसार, मामला जुआ अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों से जुड़ा है, जिनमें पुलिस ने छापेमारी और कार्रवाई के दौरान नकदी, मोबाइल फोन और ताश के पत्ते बरामद किए थे। नियमों के मुताबिक, जब्त किए गए सभी सामान को थाने के मालखाने में जमा कर उसकी विधिवत रजिस्टर में एंट्री की जाती है। लेकिन जब अदालत ने इन मामलों में जब्त सामान का ब्यौरा मांगा, तो जो तस्वीर सामने आई उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।

जांच में पाया गया कि 1,40,730 रुपये नकद गायब हैं। 7 मोबाइल फोन रिकॉर्ड से लापता हैं। ताश के पत्ते भी मालखाने के हिसाब से उपलब्ध नहीं हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि मालखाना रजिस्टर में जब्त सामान की एंट्री ही नहीं मिली यानि या तो जब्त सामान कभी विधिवत जमा ही नहीं कराया गया, या फिर जमा दिखाकर बाद में गायब कर दिया गया।

अदालत ने सख्त टिप्पणी के साथ दिए आदेश

मामले को बेहद गंभीर मानते हुए एसीजेएम बटेश्वर कुमार ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रथम दृष्टया सरकारी अभिरक्षा में रखे माल के गबन का मामला प्रतीत होता है। अदालत ने आदेश दिया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाए। जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका तय की जाए।

दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज किया जाए। जब्त माल की अभिरक्षा और रिकॉर्ड प्रणाली की जवाबदेही तय की जाए। कोर्ट के इस आदेश ने साफ कर दिया है कि न्यायपालिका इस मामले को सामान्य त्रुटि मानने के मूड में नहीं है।

मालखाना व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

थाना मंटोला के इस खुलासे ने पुलिस थानों की मालखाना प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मालखाना वह स्थान होता है जहां किसी भी मुकदमे से जुड़ा जब्त सामान, नकदी, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखे जाते हैं। यदि वहीं से सामान गायब होने लगे, तो न केवल केस कमजोर पड़ते हैं बल्कि न्याय प्रक्रिया पर भी सीधा असर पड़ता है।

इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं जब्त नकदी और सामान रजिस्टर में दर्ज क्यों नहीं किया गया? क्या यह केवल लापरवाही है या सुनियोजित गबन? जब्त माल की निगरानी कौन कर रहा था? क्या ऐसे और भी मामले हो सकते हैं जहां रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई हो? क्या उच्चाधिकारियों ने समय-समय पर मालखाने का सत्यापन किया था?

गायब रकम से ज्यादा बड़ा है भरोसे का नुकसान

1.40 लाख रुपये की रकम और कुछ मोबाइल फोन का गायब होना सिर्फ वित्तीय नुकसान का मामला नहीं है। यह पुलिस की विश्वसनीयता, साक्ष्य संरक्षण, और न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा हमला है। जब अदालत की निगरानी में पेश होने वाला जब्त माल ही गायब मिले, तो आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि कानून के रखवालों की निगरानी कौन करेगा?

यह मामला इसलिए भी ज्यादा गंभीर है क्योंकि जुआ अधिनियम के मुकदमों में जब्त नकदी और सामान अक्सर अदालती सुनवाई में महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। यदि साक्ष्य ही गायब हो जाएं, तो आरोपी को लाभ और केस को नुकसान हो सकता है।

दोषी पुलिसकर्मियों पर अब कानूनी शिकंजा संभव

कोर्ट के निर्देशों के बाद अब संबंधित पुलिसकर्मियों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि जानबूझकर जब्त माल की एंट्री नहीं की गई या उसे गायब किया गया, तो संबंधित कर्मियों पर न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि गबन, साक्ष्य से छेड़छाड़ और कर्तव्य में घोर लापरवाही जैसे गंभीर आरोप भी लग सकते हैं। इस मामले के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी पुराने रिकॉर्ड, लंबित मुद्देमाल और मालखाना निरीक्षण को लेकर सतर्कता बढ़ सकती है।

आगरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगा बड़ा सवालिया निशान

थाना मंटोला का यह मामला केवल एक थाने तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। अगर थानों में जब्त माल की सुरक्षा और रिकॉर्डिंग में इस स्तर की अनियमितता है, तो यह न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। अब देखना होगा कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है, जिम्मेदारों पर कितनी सख्ती होती है और क्या इस मामले के बाद पुलिस महकमे में मालखाना प्रबंधन को लेकर कोई ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं या नहीं।