नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही सियासी पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। मतदान से ठीक पहले सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के बीच सीधा टकराव सामने आया है। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से मिलने पहुँचे टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने आयोग पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया है, तो दूसरी ओर चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर बेहद सख्त लहजे में जवाब देकर सबको चौंका दिया है।
7 मिनट की मीटिंग और ‘गेट लॉस्ट’ का विवाद
मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में एक डेलिगेशन दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने पहुँचा था। मुद्दा था वोटर लिस्ट से कथित तौर पर 91 लाख नाम काटे जाने की शिकायत।
मीटिंग के बाद बाहर निकले डेरेक ओ ब्रायन ने पत्रकारों के सामने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा ”7 मिनट की मुलाकात में मुख्य चुनाव आयुक्त ने हमसे कहा— Get Lost (यहाँ से निकल जाओ)। हम देश की दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी हैं और हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया गया। जब उन्होंने निकलने को कहा, तो हम बाहर आ गए।”
डेरेक ने बांग्लाभाषी मतदाताओं को संबोधित करते हुए इसे ‘बंगाल का अपमान’ करार दिया और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
निर्वाचन आयोग का ‘चौंकाने वाला’ पलटवार
जिस समय डेरेक ओ ब्रायन आयोग को कोस रहे थे, ठीक उसी वक्त निर्वाचन आयोग के आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एक पोस्ट साझा किया गया। इस पोस्ट की भाषा ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
आयोग ने तीनों चुनाव आयुक्तों की मुस्कुराती तस्वीर के साथ हिंदी में लिखा ”चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव: भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे।”
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
चुनाव आयोग के इस ट्वीट पर कई राजनीतिक विश्लेषकों और यूजर्स ने हैरानी जताई है। लोगों का कहना है कि आयोग की भाषा किसी संवैधानिक संस्था के बजाय किसी राजनीतिक दल के ‘हैंडल’ जैसी लग रही है। “बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर आयोग ने सीधे तौर पर बंगाल की चुनावी कार्यप्रणाली पर कड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
वोटर लिस्ट में नाम कटने के आरोपों से शुरू हुई यह लड़ाई अब ‘सम्मान और शुचिता’ की जंग बन गई है। जहाँ टीएमसी इसे अपनी अस्मिता पर हमला बता रही है, वहीं चुनाव आयोग ने अपनी ‘मुस्कुराती तस्वीर’ और ‘सख्त शब्दों’ से यह साफ कर दिया है कि बंगाल में इस बार चुनावी सख्ती अभूतपूर्व होने वाली है।

