फिल्मी चमक से फकीरी के जज्बे तक: सरदार सिंह सूरी की कहानी, जिन्होंने टैक्सी ड्राइवर से फिल्म मेकर तक का तय किया सफर

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मुंबई (अनिल बेदाग): इतिहास उन लोगों को याद नहीं रखता जो सिर्फ अपने लिए जीते हैं, बल्कि उन्हें याद रखता है जिन्होंने दूसरों के अंधेरे जीवन में उजाला भरा हो। सरदार सिंह सूरी एक ऐसी ही विरल शख्सियत थे। रुपहले पर्दे की चकाचौंध से लेकर मानवता की निस्वार्थ सेवा तक, उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम रोमांचक और प्रेरणादायक नहीं है। हाल ही में उनकी 7वीं पुण्यतिथि पर चार बंगला गुरुद्वारा साहिब में उमड़ा जनसैलाब इस बात की तस्दीक कर रहा था कि सेवा की खुशबू कभी कम नहीं होती।

​पंजाबी सिनेमा को दी नई पहचान

एक सफल फिल्म निर्माता के रूप में सूरी साहब ने पंजाबी सिनेमा के स्वर्ण युग को परिभाषित किया। उनकी कालजयी फिल्म “एह धरती पंजाब दी” ने न केवल व्यावसायिक सफलता के झंडे गाड़े, बल्कि सामाजिक सौहार्द की एक नई मिसाल पेश की। इसी फिल्म के जरिए प्रेम चोपड़ा जैसे दिग्गज कलाकारों को एक बड़ी पहचान मिली, जबकि मोहम्मद रफी की मखमली आवाज़ ने इस फिल्म के संगीत को अमर बना दिया।

​रावलपिंडी से मुंबई तक: संघर्षों का महाकाव्य

सरदार सिंह सूरी का जीवन संघर्ष की भट्टी में तपकर कुंदन बना था। रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) से विस्थापन का दंश झेलने के बाद, उन्होंने अंबाला में शून्य से शुरुआत की। जब वे मुंबई आए, तो पेट पालने के लिए उन्होंने टैक्सी तक चलाई। इन कठिन हालातों ने उनके हौसले को तोड़ने के बजाय और मजबूत किया। उन्होंने साबित किया कि इंसान अपनी मेहनत से अपनी तकदीर खुद लिख सकता है।

​इंसानियत का ‘गुरुद्वारा’: सेवा का वटवृक्ष

सूरी साहब का दिल हमेशा दूसरों के लिए धड़कता था। 1967 में उन्होंने एक गुरुद्वारे की नींव रखी, जो आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। आज यह केंद्र जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर हजारों जरूरतमंदों को भोजन, शिक्षा और चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहा है। कोरोना महामारी हो या कोई प्राकृतिक आपदा, सूरी साहब द्वारा शुरू की गई यह सेवा परंपरा हमेशा सबसे आगे रही है।

​विरासत को आगे बढ़ा रहे बेटे

सरदार सिंह सूरी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सेवा की विरासत को उनके सुपुत्र जसपाल सिंह सूरी और मनिंदर सिंह सूरी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। सूरी साहब का जीवन हमें सिखाता है कि शोहरत और पैसा क्षणभंगुर हैं, लेकिन मानवता के लिए किया गया कार्य ही आपको अमर बनाता है।