आगरा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा आगमन से ठीक 24 घंटे पहले सोमवार को प्रशासन के हाथ-पांव उस वक्त फूल गए, जब ‘ग्रेटर आगरा’ परियोजना से प्रभावित किसानों ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के ‘उड़नखटोले’ को जमीन पर न उतरने देने की चेतावनी दे डाली। ग्राम मनोहरपुर के पास जुटे सैकड़ों किसानों ने मुआवजे की विसंगतियों को लेकर मोर्चा खोल दिया था। हालांकि, देर शाम जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी के दखल और ठोस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त करने का फैसला लिया।
मुआवजे की आग और ‘चक्का जाम’ की धमकी
मंगलवार को रायपुर-रहनकलां में होने वाले ग्रेटर आगरा परियोजना के भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और किसान पार्टी के नेतृत्व में दर्जनभर गांवों के किसान लामबंद हो गए थे।
किसान नेता विपिन यादव और मनोज शर्मा का आरोप है कि पूर्व में मिले आश्वासनों के बावजूद एडीए (ADA) ने किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया है। नाराज किसानों ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे मुख्यमंत्री का कार्यक्रम बाधित करेंगे।
अधिकारियों की दौड़-भाग और हाई-वोल्टेज ड्रामा
धरने की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। पहले नायब तहसीलदार और फिर एसडीएम एत्मादपुर सुमित कुमार सिंह व एसीपी देवेश कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। किसान इस बात पर अड़े थे कि जब तक एडीए उपाध्यक्ष एम. अरुन्मौली मौके पर नहीं आतीं और मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय तय नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे। घंटों चले इस ड्रामे के कारण कार्यक्रम स्थल के आसपास तनाव का माहौल बना रहा।
डीएम की ‘फोन कॉल’ से बनी बात
जब बात हाथ से निकलती दिखी, तो एसडीएम ने मौके से ही जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी की बात फोन पर किसान नेताओं से कराई। जिलाधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार और प्रशासन उनके मुआवजे की मांग को लेकर पूरी तरह गंभीर है और वार्ता के माध्यम से हर समस्या का समाधान निकाला जाएगा। डीएम के इस ‘पर्सनल’ आश्वासन के बाद किसानों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने मंगलवार को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया।
सीएम के दौरे की सुरक्षा हुई पुख्ता
किसानों के शांत होने के बाद अब प्रशासन ने राहत की सांस ली है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहनकलां में करोड़ों की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे।
धरने में मुख्य रूप से श्यामवीर यादव, राज कुमार, देवेंद्र कुमार, पंकज शर्मा और रवि तोमर सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे, जिन्होंने साफ किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपनी जमीन के हक के लिए लड़ना जानते हैं।

