आगरा। विकास और सौंदर्यीकरण के बड़े-बड़े दावों के बीच आगरा का यमुना विहार फेस-2 इलाका अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को हुई महज 15 मिनट की बारिश ने नगर निगम के ड्रेनेज सिस्टम की ऐसी पोल खोली कि सैकड़ों परिवारों की जिंदगी नरक बन गई। कॉलोनी में नालों का बैकफ्लो इस कदर बढ़ा कि गंदा पानी, कीचड़, मलबा और यहाँ तक कि मरे हुए मवेशी भी लोगों के ड्राइंग रूम तक पहुँच गए। करीब 100 घरों में घुसे इस सैलाब ने लाखों का फर्नीचर और जरूरी दस्तावेज बर्बाद कर दिए।
कुदरत का कहर या मानवीय भूल? घरों में तैरने लगा सामान
दोपहर को शुरू हुई बारिश ने लोगों को संभलने का मौका भी नहीं दिया। देखते ही देखते सड़कों का पानी घरों की दहलीज पार कर गया। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, कॉलोनी के आसपास हुए अनियोजित निर्माण कार्यों ने पानी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया है, जिससे सारा गंदा पानी अब सीधे यमुना विहार की ओर मुड़ जाता है। कई घरों में अलमारियां और दीवान पानी में डूब गए, जिससे कपड़े और अनाज खराब हो गया। दुर्गंध और सीलन के कारण लोगों का अपने ही घर में सांस लेना दूभर हो गया है।
खौफनाक मंजर: मरे हुए मवेशी और सिल्ट ने फैलाई दहशत
बारिश के साथ बहकर आई गंदगी ने कॉलोनी में संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा कर दिया है। मरे हुए जानवरों के अवशेष और नालों की काली सिल्ट देखकर महिलाएं और बच्चे दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि यदि बारिश 15 मिनट से ज्यादा रहती, तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। इसी डर के मारे आधी रात तक कॉलोनीवासी घुटनों तक भरे पानी में खड़े होकर अपनी सुरक्षा पर चर्चा करते रहे।
पार्षद कार्यालय पर प्रदर्शन: आश्वासनों से ऊब चुकी है जनता
शनिवार सुबह आक्रोशित कॉलोनीवासी एकजुट होकर क्षेत्रीय पार्षद कंचन बंसल और पवन बंसल के कार्यालय पहुँचे। हालांकि, पार्षदों ने साफ-सफाई का भरोसा तो दिया, लेकिन स्थायी जल निकासी के सवाल पर इसे एक “बड़ा प्रोजेक्ट” बताकर गेंद उच्च अधिकारियों के पाले में डाल दी। स्थानीय नागरिक रमेश चंद शर्मा और मुकेश गुप्ता का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से हर चौखट पर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन ही नसीब हुए।
मानसून की आहट से सहमे लोग, प्रशासन को दी चेतावनी
अभी तो सिर्फ अप्रैल की शुरुआत है, लेकिन 15 मिनट के इस ‘ट्रेलर’ ने मानसून की भयावह तस्वीर साफ कर दी है। स्थानीय लोगों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि मानसून से पहले ड्रेनेज सिस्टम की री-डिजाइनिंग और स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो यह मानवीय संकट का रूप ले लेगा।
प्रशांत गुप्ता, दीपक गुप्ता और विकास तिवारी समेत दर्जनों लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कागजी विकास के बजाय धरातल पर ड्रेनेज प्लान लागू किया जाए, ताकि यमुना विहार के नागरिकों को उनका सम्मानजनक जीवन वापस मिल सके।

