मिडिल ईस्ट में संकट गहराया: राज्यसभा में बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर— 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराते सैन्य तनाव और ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर हुए हमलों के बाद भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। राज्यसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण संघर्ष में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है और ईरान के वरिष्ठ नेताओं की मौत की खबरों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।

CCS की आपात बैठक: हर स्थिति से निपटने की तैयारी

हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में ईरान पर हुए हमलों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा, कच्चे तेल की आपूर्ति (Energy Supply) और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर की विस्तृत समीक्षा की गई। सरकार ने सभी संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए ‘इवेकुएशन प्लान’ और वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों पर तैयार रहें।

​खाड़ी देशों में फंसे 1 करोड़ भारतीयों की चिंता

विदेश मंत्री ने संसद को जानकारी दी कि मिडिल ईस्ट का यह संकट भारत के लिए सीधा चिंता का विषय है क्योंकि खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय कार्यरत हैं। इसके अलावा ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और व्यापारी मौजूद हैं। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन और भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं।

उन्होंने कहा, “जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए सरकार तुरंत और कड़े कदम उठाएगी।”

भारत की अपील: ‘संयम बरतें सभी पक्ष’

भारत ने एक बार फिर अपना पुराना रुख दोहराते हुए सभी देशों से संयम बरतने की अपील की है। विदेश मंत्री ने कहा कि सैन्य टकराव कभी भी समाधान नहीं हो सकता और इससे केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी। भारत शांति, संवाद और कूटनीतिक रास्तों के जरिए विवाद सुलझाने का पक्षधर है।