काठमांडू/नई दिल्ली। हिमालयी राष्ट्र नेपाल में हुए आम चुनावों के नतीजों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। पिछले साल हुए हिंसक ‘जेन-जी’ (Gen-Z) विरोध प्रदर्शनों के बाद हुए इस पहले चुनाव में जनता ने पारंपरिक राजनीतिक धुरंधरों को नकारते हुए काठमांडू के पूर्व मेयर और मशहूर रैपर बालेंद्र शाह (बालेन) की ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) को सत्ता की चाबी सौंप दी है।
बहुमत के आंकड़े के पार RSP, ओली की करारी हार
नेपाल निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 165 सीटों के लिए हुए मतदान में आरएसपी ने अब तक 119 सीटों पर जीत या बढ़त हासिल कर ली है, जो बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक है। सबसे बड़ा उलटफेर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सीट पर देखने को मिला, जहाँ वे खुद बालेंद्र शाह के उम्मीदवार से चुनाव हार गए हैं। ओली की पार्टी (CPN-UML) को अब तक मात्र 3 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।
काठमांडू में सूपड़ा साफ
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने राजधानी काठमांडू जिले के सभी 10 निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्षी दलों का सफाया कर दिया है। शेर बहादुर देउबा की ‘नेपाली कांग्रेस’ और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की ‘माओइस्ट सेंटर’ को इस चुनाव में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। नेपाली कांग्रेस अब तक केवल 10 सीटों पर ही सिमटती नजर आ रही है।
PM मोदी ने दी बधाई: ‘साझा शांति’ का मंत्र
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में सफल और शांतिपूर्ण चुनाव आयोजन पर वहां की जनता और सरकार को बधाई दी है। पीएम मोदी ने इस जीत को नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा का एक ‘ऐतिहासिक मील का पत्थर’ बताया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भारत एक करीबी पड़ोसी के तौर पर नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर शांति और खुशहाली के लिए काम करने के वादे पर कायम है।
जेन-जी और बदलाव की लहर
बता दें कि 5 मार्च को हुए इन चुनावों में लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह चुनाव केपी शर्मा ओली की गठबंधन सरकार गिरने के बाद हुए थे। नेपाल के युवाओं (Gen-Z) ने जिस तरह से बालेंद्र शाह के ‘बदलाव’ के नारे का समर्थन किया है, उसने देश के पुराने राजनीतिक ढांचे को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। अब बालेंद्र शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभरे हैं।

