संसद में ‘महा-संग्राम’: ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को TMC का समर्थन, सोमवार को वोटिंग के आसार, भाजपा- कांग्रेस का ह्विप

National

नई दिल्ली। सोमवार, 9 मार्च से शुरू हो रहे बजट सत्र का दूसरा चरण भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे हंगामेदार सत्रों में से एक होने जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी अपना खुला समर्थन दे दिया है। टीएमसी के इस कदम के बाद अब सदन के भीतर मतविभाजन (Voting) की स्थिति बन रही है, जिससे सियासी तापमान चरम पर पहुँच गया है।

TMC का रुख: “हम अविश्वास के पक्ष में”

शनिवार को टीएमसी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि पार्टी के लगभग सभी सांसद (बीमार सदस्यों को छोड़कर) सोमवार को सदन में उपस्थित रहेंगे और ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव पर मतदान करेंगे। टीएमसी नेता ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन के अन्य घटक दलों के साथ भी निरंतर संपर्क में हैं ताकि विपक्षी एकजुटता को और मजबूत किया जा सके।

​विपक्ष के गंभीर आरोप: “पक्षपाती रहे स्पीकर”

​विपक्ष के कम से कम 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव के जरिए ओम बिरला पर निष्पक्षता न बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि:

​स्पीकर विवादास्पद मामलों में खुले तौर पर सत्तारूढ़ दल (BJP) का पक्ष लेते हैं।

​नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं दी गई।

​बजट सत्र के पहले चरण में आठ सांसदों का निलंबन लोकतंत्र के विरुद्ध है।

उनके रवैये से सदन के सदस्यों के अधिकारों का हनन हो रहा है।

ईरान-इजरायल विवाद पर भी घिरेगी सरकार

​अविश्वास प्रस्ताव के अलावा, विपक्षी दल इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। कांग्रेस समेत कई दलों ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर भारत सरकार से आधिकारिक बयान जारी करने और सदन में विस्तृत चर्चा की मांग की है।

​दोनों तरफ से ‘व्हिप’ जारी: सांसदों की हाजिरी अनिवार्य

सदन में होने वाले विधायी कार्यों और संभावित वोटिंग को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने कमर कस ली है:

​भाजपा (BJP): अपने सांसदों को 9-10 मार्च के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा है।

​कांग्रेस (Congress): अपने सांसदों को 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूद रहने का सख्त निर्देश दिया है।

​9 मार्च को क्या होगा?

सोमवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू होगी, अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर विचार किया जाएगा। यदि प्रस्ताव को सदन की अनुमति मिलती है, तो यह केंद्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष की कार्यप्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।