ईरानी युद्धपोत के डूबने पर भारत का कड़ा रुख: “अमेरिका को नहीं दी कोई खुफिया जानकारी, दावे निराधार और बेतुके”

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​नई दिल्ली। हिंद महासागर में अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को डुबोए जाने के मामले में भारत सरकार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। शीर्ष सरकारी सूत्रों ने उन मीडिया रिपोर्टों और दावों को पूरी तरह से ‘निराधार और बेतुका’ करार दिया है, जिनमें कहा गया था कि भारतीय नौसेना ने अमेरिका को इस युद्धपोत के बारे में खुफिया जानकारी (Intelligence) मुहैया कराई थी।

​”लॉजिस्टिक्स समझौता खुद से लागू नहीं होता”

​एक शीर्ष भारतीय अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका या उसकी मिलिट्री को इस ऑपरेशन के लिए किसी भी तरह की खुफिया सहायता नहीं दी। उन्होंने तकनीकी स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) जैसी व्यवस्थाएं ऐसी परिस्थितियों में खुद-ब-खुद (Automatically) अमल में नहीं आतीं। भारत की नीति इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट और तटस्थ रही है।

​मिलन 2026 से लौट रहा था युद्धपोत

​चौंकाने वाली बात यह है कि ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन 2026’ (MILAN 2026) में हिस्सा लेकर ईरान लौट रहा था। इसी दौरान श्रीलंकाई समुद्र के पास, भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) से लगभग 370 किलोमीटर दूर अमेरिकी सबमरीन ने टॉरपीडो से हमला कर इसे डुबो दिया। इस हमले में 87 ईरानी नाविकों की मौत की खबर है।

​ईरान का पक्ष: “पोत खाली और निहत्था था”

​रायसीना डायलॉग में हिस्सा लेने आए ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हमारा युद्धपोत हमारे भारतीय मित्र के निमंत्रण पर अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास में शामिल होने आया था। वह औपचारिक यात्रा पर था, निहत्था था और खाली था। पश्चिम एशिया की जंग से हजारों किलोमीटर दूर उस पर हमला करना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

भारत ने चलाया था ‘सर्च और रेस्क्यू’ ऑपरेशन

सरकारी सूत्रों के अनुसार, जब भारतीय नौसेना को ईरानी पोत से आपातकालीन संदेश (SOS) मिला, तो भारत ने तुरंत मानवीय आधार पर ‘सर्च और रेस्क्यू’ (SAR) ऑपरेशन शुरू किया। श्रीलंकाई नौसेना की मदद के लिए एक मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट भेजा गया और दूसरे विमान को लाइफ राफ्ट के साथ स्टैंडबाय पर रखा गया था। भारत का उद्देश्य नाविकों की जान बचाना था, न कि हमले में सहयोग करना।

​बढ़ सकता है अंतरराष्ट्रीय तनाव

इस घटना ने हिंद महासागर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है, वहीं भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी समुद्री सीमा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की मर्यादा के प्रति प्रतिबद्ध है।