बच्चों के लिए काल बना ‘ब्रेन फीवर’: 50% दौरों की जड़ है न्यूरो इन्फेक्शन, आगरा में जुटे देशभर के दिग्गजों ने दिया जीवनदान का मंत्र

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​आगरा: बच्चों में बढ़ते न्यूरोलॉजिकल विकारों के बीच ‘ब्रेन फीवर’ (मस्तिष्क ज्वर) आज सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को आने वाले 50 प्रतिशत दौरों के पीछे न्यूरो इन्फेक्शन ही मुख्य वजह है। इसी गंभीर चुनौती पर मंथन करने के लिए ताजनगरी के होटल क्लार्क्स शिराज में आयोजित दो दिवसीय ‘न्यूरो आईडीकॉन 2026’ का रविवार को समापन हुआ।

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के बैनर तले आयोजित इस कॉन्क्लेव में पीजीआई चंडीगढ़ के डॉ. सुनित सिंघी ने आगाह किया कि मस्तिष्क के भीतर होने वाला संक्रमण एक ‘मेडिकल इमरजेंसी’ है। उन्होंने जोर दिया कि इंट्राक्रैनियल प्रेशर मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए ही बच्चों की जान बचाई जा सकती है। अक्सर माता-पिता दौरों के लक्षणों को पहचान नहीं पाते, जिससे संक्रमण मस्तिष्क या मेनिन्जेस को स्थायी नुकसान पहुँचा देता है।

​इंटरनेशनल न्यूरोलॉजी ऑफ पीडियाट्रिक्स की अध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सिंघी ने बताया कि यदि बच्चा तेज बुखार के बाद बेहोश होने लगे, तो यह खतरे की घंटी है। वहीं, चीफ ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. राकेश भाटिया ने स्पाइनल फ्लूइड (रीढ़ की हड्डी के पानी) की जांच को सटीक इलाज के लिए अनिवार्य बताया।

सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों ने 44 शोध पत्र प्रस्तुत किए और 450 से अधिक डेलीगेट्स ने न्यूरो इन्फेक्शन से निपटने की नई रणनीतियों पर चर्चा की। समापन अवसर पर डॉ. अरुण जैन ने सभी विशेषज्ञों को चिकित्सा जगत में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया।