यूपी की राजनीति में ‘संत संग्राम’: नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का दावा- अखिलेश यादव ने मानवीय आधार पर खत्म किया था रामभद्राचार्य का 420 का मुकदमा

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लखनऊ। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे यौन शोषण के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘धर्मयुद्ध’ छिड़ गया है। इस मामले में विपक्षी दलों ने सरकार पर संतों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इसी कड़ी में यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने स्वामी रामभद्राचार्य पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें ‘सरकार समर्थित साधु’ करार दिया है।

अखिलेश यादव ने वापस लिया था 420 का मुकदमा

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो और बयान के अनुसार, माता प्रसाद पांडेय ने दावा किया कि स्वामी रामभद्राचार्य पर धोखाधड़ी (420) का एक गंभीर मुकदमा चल रहा था। उन्होंने कहा, “रामभद्राचार्य और उनके वाइस चांसलर रोज अखिलेश यादव के यहाँ चक्कर काटते थे और रोते थे कि बुढ़ापे में जेल चले जाएंगे। तब अखिलेश जी ने मानवीय आधार पर बड़ा दिल दिखाते हुए उनका मुकदमा वापस लिया था।”

​विपक्ष का आरोप: “संतों पर बनाया जा रहा है दबाव”

विपक्षी दलों का तर्क है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाया गया केस पूरी तरह राजनीतिक है और सरकार उनके जरिए सनातन धर्म के स्वतंत्र स्वर को दबाने की कोशिश कर रही है। माता प्रसाद पांडेय ने संकेत दिया कि जो संत सरकार के पक्ष में नहीं हैं, उन्हें कानूनी पेचीदगियों में उलझाया जा रहा है, जबकि ‘सरकारी संतों’ के पुराने रिकॉर्ड को दबा दिया गया है।

सियासी गलियारों में हड़कंप

नेता प्रतिपक्ष के इस बयान के बाद भाजपा और सपा के बीच जुबानी जंग तेज होना तय है। ज्ञात हो कि शंकराचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले आशुतोष पांडेय स्वयं को स्वामी रामभद्राचार्य का शिष्य बताते हैं, जिससे यह पूरा मामला दो बड़े संतों के अनुयायियों के साथ-साथ अब दो बड़ी राजनीतिक विचारधाराओं के बीच का टकराव बन गया है।