आगरा: कालिंदीपुरम स्थित पंचेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दूसरे दिन आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। कथा व्यास अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कुंती-भीष्म स्तुति और शुकदेव प्राकट्य के मार्मिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन का सार समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन मात्र धन संग्रह के लिए नहीं, बल्कि धर्म के पालन और लोक कल्याण के लिए समर्पित होना चाहिए।
विपत्तियों में भी ईश्वर का साथ न छोड़ें: कुंती स्तुति का संदेश
स्वामी जी ने माता कुंती के प्रसंग को उद्धृत करते हुए कहा कि कुंती माता ने विपत्ति के समय भी भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करना नहीं छोड़ा। उन्होंने भगवान से सुख नहीं, बल्कि निरंतर प्रभु की भक्ति मांगी। महाराजश्री ने सीख दी कि जीवन की कठिन परिस्थितियां भी हमें ईश्वर के और करीब ले जा सकती हैं।
कर्तव्य और धर्मनिष्ठा का उदाहरण: भीष्म स्तुति
भीष्म पितामह के प्रसंग पर चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि बाणों की शय्या पर लेटे हुए भी पितामह ने अपना ध्यान भगवान के चरणों में केंद्रित रखा। उनका जीवन सत्य, त्याग और कर्तव्य का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे भी हर परिस्थिति में अपने धर्म और कर्तव्यों का पालन करें।
शुकदेव जी के वैराग्य की महिमा
कथा के दौरान शुकदेव प्राकट्य का वर्णन करते हुए महाराजश्री ने बताया कि महर्षि शुकदेव जन्म से ही आत्मज्ञानी और वैराग्यवान थे। उन्होंने संसार की मोह-माया से ऊपर उठकर ज्ञान का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को सुनाई गई यह कथा आज भी मानवता के लिए मोक्ष का मार्ग दिखाती है।
कथा महोत्सव में उमड़ी आस्था
कार्यक्रम के मुख्य यजमान मनीष अग्रवाल एवं शिवानी अग्रवाल ने कथा व्यास का स्वागत और अभिनंदन किया। इस भक्तिमय आयोजन में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, महिलाओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। अंत में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ आरती संपन्न हुई और प्रसाद का वितरण किया गया।


